October 13, 2026

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Sagar Rajghat Dam Update: पीने के पानी के स्रोत में विसर्जित की गईं गणेश प्रतिमाएं, युवाओं ने उठाया प्रतिमाएं निकालने का बीड़ा

मध्य प्रदेश के सागर शहर, मकरोनिया नगर पालिका और सागर छावनी बोर्ड की प्यास बुझाने वाली अति-महत्वपूर्ण राजघाट जल आवर्धन परियोजना के बांध में मूर्तियों के विसर्जन पर सख्त पाबंदी के बावजूद लोगों द्वारा गणेश प्रतिमाएं विसर्जित कर दी गईं। गंभीर बात यह है कि विसर्जित की गई कई प्रतिमाएं प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की बनी हुई हैं, जो विसर्जन के 15 दिन बीत जाने के बाद भी जलस्रोत में जस की तस पड़ी हैं। इन प्रतिमाओं के साथ बड़े पैमाने पर पूजन सामग्री भी जल में प्रवाहित की गई है, जिससे पेयजल स्रोत के दूषित होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

🧹 प्रशासनिक बेरुखी के बाद युवाओं ने संभाला मोर्चा: संकल्प फाउंडेशन ने चलाया विशेष सफाई अभियान

पेजल आपूर्ति वाले बांध में गंदगी और प्रतिमाएं तैरने के बाद स्थानीय नागरिकों ने आक्रोश जताते हुए नगर निगम व संबंधित प्रशासनिक विभागों से शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन जब किसी भी सरकारी महकमे ने स्थिति की सुध नहीं ली, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय ‘संकल्प फाउंडेशन’ के युवाओं ने सफाई का बीड़ा उठाया। संस्था के रिशांक तिवारी और उनकी टीम ने स्थानीय नागरिकों की मदद से राजघाट बांध में उतरकर जल में डूबी सभी पीओपी प्रतिमाओं और तैरती पूजन सामग्री को ससम्मान बाहर निकाला।

🛕 ससम्मान निस्तारण के लिए बनाया जा रहा है विशेष कुंड: पर्यावरण और आस्था दोनों के संरक्षण का दिया संदेश

संकल्प फाउंडेशन के सदस्यों ने बताया कि जल से निकाली गई सभी प्रतिमाओं का धार्मिक मान्यताओं और पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों के अनुसार उचित तरीके से विसर्जन किया जाएगा। इसके लिए संस्था द्वारा राजघाट बांध के समीप ही एक विशेष कुंड का निर्माण कराया जा रहा है। संस्था के प्रतिनिधियों का कहना है कि भगवान गणेश की पूजा-अर्चना पूरे विधान से करने के बाद विसर्जन के नाम पर प्रतिमाओं को इस तरह लावारिस जल स्रोतों में छोड़ देना आस्था और पर्यावरण दोनों के खिलाफ है, इसलिए इसका स्थायी और सम्मानजनक समाधान जरूरी है।

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