डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के जूलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च टीम ने सागर और पचमढ़ी की झीलों और नदियों के पानी को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पचमढ़ी झील के पानी में ‘कैडमियम’ की मात्रा निर्धारित अनुमेय सीमा (Permissible Limit) से अधिक पाई गई है, जिसका लंबे समय तक सेवन करने से गुर्दे (किडनी) खराब होने, हड्डियों में कमजोरी और कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। हालांकि अन्य धातुएं सीमा के भीतर हैं, लेकिन लगातार संपर्क से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गहरा असर पड़ सकता है।
🔬 डीबीटी और डीएसटी प्रोजेक्ट के तहत हुई स्टडी: स्प्रिंगर नेचर पत्रिका में हुई प्रकाशित
यह महत्वपूर्ण शोध भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट (DBT BUILDER), DST-SERB और ANRF-ARG के सहयोग से किया गया है। रिसर्च टीम ने ICP-MS तकनीक का उपयोग कर पानी के नमूनों में स्ट्रॉन्शियम, कैडमियम, मैंगनीज, कॉपर, निकेल और बेरियम जैसी भारी धातुओं की जांच की। पचमढ़ी झील के पानी में स्ट्रॉन्शियम (27.54 ppb) और कैडमियम (0.69 ppb) का स्तर काफी ऊंचा पाया गया है। रिसर्च हेड डॉ. राजकुमार कोईरी और उनकी टीम ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर मुद्दा बताया है।
🧪 सेहत पर प्रभाव और वैज्ञानिकों की सरकार व आम जनता से अपील
वैज्ञानिकों ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों में नियमित जल परीक्षण, स्वास्थ्य शिविर और जनजागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की है। इसके अलावा, आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे झील या नदी का कच्चा पानी सीधे न पिएं, क्योंकि उबालने से भारी धातुएं पानी से अलग नहीं होती हैं। पानी के शुद्धिकरण के लिए प्रमाणित फिल्टर का उपयोग करें और किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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