दाल हो या सब्जी, लहसुन का तड़का लगने से खाने का स्वाद दोगुना हो जाता है, यही वजह है कि मसालों की तरह लहसुन की मांग बाजार में सालभर बनी रहती है। औषधीय गुणों से भरपूर और गर्म तासीर वाली लहसुन की खेती किसानों के लिए हमेशा से एक फायदे का सौदा साबित होती है। ठंड की शुरुआत के साथ ही इसकी बुवाई का सही सीजन आ जाता है। यदि सही तरीके से देखरेख की जाए, तो किसान लहसुन की फसल से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं।
🌱 कृषि वैज्ञानिक से जानें लहसुन के लिए उपयुक्त मिट्टी, तापमान और फर्टिलाइजर का सही डोज
कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति के अनुसार, लहसुन की खेती के लिए बलुई दोमट या उपजाऊ चिकनी दोमट मिट्टी सबसे बेहतरीन मानी जाती है, जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो और पीएच (pH) लेवल 6.0 से 7.5 के बीच हो। इसके वेजिटेटिव ग्रोथ के लिए 18 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उत्तम होता है। खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ के हिसाब से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ-साथ सल्फर का इस्तेमाल बेहद जरूरी है, क्योंकि सल्फर से ही लहसुन में विशिष्ट गंध (एलिसिन) विकसित होती है। बुवाई के दौरान पौधों से पौधों की दूरी 10 सेमी और कतार से कतार की दूरी 15 सेमी रखनी चाहिए।
📈 बाजार में मांग और उन्नत वैरायटी: 130 से 150 दिन में तैयार हो जाती है फसल
सब्जी मंडियों में क्वालिटी के हिसाब से लहसुन डेढ़ सौ से ढाई सौ रुपए प्रति किलो तक बिकती है। किसानों के लिए यमुना सफेद-2, यमुना सफेद-3, यमुना सफेद-4, पार्वती, नासिक और ऊटी जैसी उन्नत प्रजातियां काफी फायदेमंद साबित हो रही हैं। आमतौर पर लहसुन की फसल 130 से 150 दिन यानी करीब साढ़े चार से पांच महीने में तैयार हो जाती है। अक्टूबर और नवंबर में बुवाई करने पर यह फसल मार्च के आसपास कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जब पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती हैं।

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