उज्जैन(डॉ हीना तिवारी): वैसे तो पूरे साल ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शनों के लिए आते हैं। लेकिन श्रावण माह में ये आंकड़ा दो गुना से भी अधिक हो जाता है। आज शुक्रवार से श्रावण माह की शुरूआत हुई। जिसके चलते रात 12 बजे से श्रद्धालुजन मंदिर पहुंच गए थे।
आज तड़के 03.00 बजे बाबा महाकाल मंदिर के गर्भगृह के पट खोले गए और भगवान को हरिओम जल चढ़ाया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ। अभिषेक पूजन के उपरान्त भांग और सूखे मेवे से भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान के इस निराकार से साकार रूप को देखने के लिए हजारों भक्त मंदिर में उपस्थित थे। किसी ने इस दृश्य को साक्षात देखा, तो किसी ने मंदिर परिसर में लगी हुई एलईडी स्क्रीन पर। पूजन श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महानिर्वाणी अखाड़े के मंहतों ने भगवान महाकाल को भस्मीभूत किया। भस्मीभूत होने के बाद सुबह की पहली और प्रसिद्ध भस्म आरती आरंभ हुई। घंटे, घड़ियाल, झांज-मंजीरे और शंख ध्वनि के बीच सृष्टि के अधिपति की आराधना की गई। ये दृश्य मंदिर में उपस्थित जिस भी धर्मालु ने देखा, उसने खुद को सौभग्यशाली माना।
श्रावण माह के पहले दिन से ही बाबा महाकाल के दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी हैं। पूरे सावन माह में बड़ी संख्या में भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुँचेंगे। मंदिर समिति द्वारा भी बाबा महाकाल के भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं ताकि सावन माह में भक्तों को बाबा के दर्शन के लिए परेशान न होना पड़े और शीघ्र बाबा महाकाल के दर्शन हो जाए।
पूरे सावन माह में लाखों भक्त बाबा महाकाल के दर्शन करने बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुँचेंगे। मंदिर परिसर सहित उज्जैन बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान हो रहा हैं। हर कोई बाबा महाकाल के जयकारे लगाते हुए बाबा के दर्शन को आतुर नजर आ रहा हैं।

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