September 11, 2026

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MP Agriculture: शहडोल में मौसम के बदलाव से धान पर लीफ ब्लाइट बैक्टीरिया का खतरा, 50% तक हो सकता है नुकसान

शहडोल। शहडोल जिला मुख्य रूप से आदिवासी बहुल इलाका है, जहां खरीफ सीजन में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां का लगभग हर किसान धान की फसल उगाता है। पिछले कुछ दिनों से जिले में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। 15 से 20 दिनों की लगातार बारिश के बाद अब पिछले एक-दो दिनों से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन मौसम में बार-बार बदलाव हो रहा है—कभी तेज धूप निकल आती है तो कभी बारिश होने लगती है। ऐसे मौसम में फसलों पर बीमारियां लगने का खतरा काफी बढ़ गया है। कुछ किसानों ने अपनी धान की फसल में ‘लीफ ब्लाइट बैक्टीरिया’ (जीवाणु झुलसा रोग) लगने की शिकायत कृषि वैज्ञानिकों से की है।

🍂 धान के पीले पड़ते पत्ते देख चिंतित हुए किसान, वैज्ञानिकों से किया संपर्क

शहडोल जिले के चटहा गांव निवासी अनिल सिंह और आसपास के किसानों ने बताया कि उनके खेतों में अजीब तरह का रोग देखने को मिल रहा है। इसमें धान की पत्तियों के किनारों पर पीले रंग के धब्बे पड़ रहे हैं, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं। किसानों के अनुसार, यह लक्षण ‘बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट’ जैसा लग रहा है। इस संबंध में उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लिया है। वैज्ञानिकों ने भी इसे बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट होने की पुष्टि की है और इसके नियंत्रण के उपाय बताए हैं। किसान अब शीघ्र ही अनुशंसित दवा का छिड़काव करने जा रहे हैं ताकि फसल को रोगमुक्त किया जा सके।

🦠 क्या है ‘लीफ ब्लाइट बैक्टीरिया’ और कैसे करें इसकी पहचान?

कृषि वैज्ञानिक डॉ. नितिन सिंघई ने बताया, “बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट को स्थानीय भाषा में जीवाणु झुलसा या पत्ती झुलसा रोग भी कहा जाता है। यह फसलों में जीवाणुओं द्वारा फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है। इसके मुख्य लक्षणों की बात करें तो पत्ती के ऊपरी सिरे से किनारों के सहारे पीले रंग के धब्बे बनने लगते हैं। यदि धब्बे अधिक संख्या में दिखें, तो प्रभावित पत्ती को हाथ से मसलने पर एक चिपचिपा पदार्थ निकलता है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि फसल में यह रोग लग चुका है।”

💊 कैसे करें इस बैक्टीरिया का प्रभावी उपचार?

कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, जीवाणु जनित रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP (Copper Oxychloride 50% WP) का छिड़काव करना चाहिए।

  • उपयोग की मात्रा: 1 ग्राम दवा प्रति 1 लीटर पानी में घोलकर फसलों पर छिड़काव करें।
  • सावधानी: यदि समय रहते इस बीमारी का निदान नहीं किया गया, तो धान की पैदावार में 20 से 50 प्रतिशत तक का भारी नुकसान हो सकता है।
🌧️ खरीफ सीजन की मुख्य फसल है धान, बिगड़े मौसम से बढ़ा जोखिम

शहडोल जिले में खरीफ सीजन की मुख्य उपज धान ही है। छोटे-बड़े सभी किसान मुख्य रूप से वर्षा आधारित एक-फसली खेती करते हैं। इस वर्ष शुरुआत में बारिश की गति धीमी रही, लेकिन बाद में हुई जोरदार बारिश से किसानों ने रोपाई का कार्य पूरा किया। हालांकि, रोपाई के बाद अत्यधिक बारिश, नमी और उमस भरे बिगड़े मौसम के कारण खेतों में बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है। वर्तमान में फसलों में झुलसा रोग और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट के लक्षण देखे जा रहे हैं, जिसके लिए सतर्कता और सही समय पर उपचार अति आवश्यक है।

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