भारत के सोने के बाजार में तस्करी का असर बढ़ता दिख रहा है. अवैध तरीके से भारत लाया गया सोना वैध बाजार के मुकाबले करीब ₹8,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता बेचा जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, इस साल 100 टन से ज्यादा सोना अवैध रास्तों से भारत आ सकता है. इससे वैध तरीके से कारोबार करने वाले डीलर्स और ज्वेलर्स पर दबाव बढ़ गया है.
यह दावा द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सोने की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद वैध और अवैध बाजार के बीच कीमत का अंतर बढ़ा है. इससे तस्करी के जरिए आने वाला सोना बेचने वालों के लिए बाजार ज्यादा आकर्षक हो गया है.
सोना सस्ता कैसे बिक रहा है?
सोने की तस्करी बढ़ने की एक बड़ी वजह आयात शुल्क में बढ़ोतरी को माना जा रहा है. मई में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई. इससे कानूनी तरीके से भारत में आने वाले सोने की लागत बढ़ गई. दूसरी ओर, तस्करी के जरिए आने वाले सोने पर ये शुल्क नहीं देना पड़ता. ऐसे में तस्कर और ग्रे मार्केट में काम करने वाले लोग सोना कम कीमत पर बेच सकते हैं. इसी वजह से वैध बाजार और अवैध बाजार की कीमतों के बीच अंतर बढ़ गया है. इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बाजार में मौजूदा डिस्काउंट इस बात का संकेत है कि ग्रे मार्केट फिर से सक्रिय हो रहा है.
DRI ने तेज की कार्रवाई
सोने की तस्करी बढ़ने की खबर ऐसे समय आई है, जब Directorate of Revenue Intelligence यानी DRI ने संगठित तस्करी गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. सरकार की ओर से 25 जुलाई को जारी सबसे हालिया आंकड़ों के मुताबिक, DRI ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई करते हुए 27 किलो से ज्यादा विदेशी मूल का तस्करी वाला सोना जब्त किया. इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया. हालांकि, इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि तस्करी का नेटवर्क अभी भी काफी सक्रिय है.
ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी से बढ़ सकती है तस्करी
World Gold Council यानी WGC ने भी पहले इस तरह के ट्रेंड की ओर इशारा किया है. संगठन के मुताबिक, जब भारत में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी ज्यादा होती है तो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच अंतर बढ़ जाता है. इससे सोने की तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है. इसका एक उदाहरण 2013-14 में देखने को मिला था. 2013 की शुरुआत में सोने की इंपोर्ट ड्यूटी में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 2014 की पहली तिमाही में अवैध सोने का आयात करीब 70 टन पहुंच गया था. एक साल पहले इसी अवधि में यह करीब 10 टन था. बाद में 2013 के अंत से 2019 के बीच सोने पर ड्यूटी करीब 10% रहने के बावजूद तस्करी पूरी तरह खत्म नहीं हुई. इस दौरान अवैध आयात औसतन करीब 34 टन प्रति तिमाही रहा.
2022 में भी बढ़ी थी तस्करी
ऐसा ही ट्रेंड 2022 में भी देखने को मिला था. उस समय सरकार ने सोने पर प्रभावी ड्यूटी 10.75% से बढ़ाकर करीब 15% कर दी थी. इसके बाद अवैध सोने का आयात बढ़कर साल के अंत तक करीब 50 टन पहुंच गया. 2022 की दूसरी तिमाही में यह करीब 17 टन था. 2023 के बड़े हिस्से में भी तस्करी का स्तर ऊंचा बना रहा.
ज्वेलरी इंडस्ट्री ने ड्यूटी घटाने की मांग की
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक, सोने की अवैध एंट्री का सबसे ज्यादा नुकसान संगठित और वैध कारोबार को हो रहा है. उनका कहना है कि सरकार को सोने पर ड्यूटी बढ़ाने के बजाय ज्वेलरी और सोने के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने सरकार से सोने की ड्यूटी घटाकर 5% करने पर विचार करने की मांग की है.
वैध कारोबारियों के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
वैध कारोबारी सोना आयात करते समय तय शुल्क और दूसरे नियमों का पालन करते हैं. इससे उनकी लागत बढ़ती है. वहीं, तस्करी के जरिए आने वाले सोने पर ये लागत नहीं होती. इस वजह से अवैध बाजार में सोना कम कीमत पर उपलब्ध हो जाता है. अगर यह अंतर ज्यादा बढ़ता है तो ग्राहक भी सस्ते सोने की ओर आकर्षित हो सकते हैं. इसका सीधा असर उन डीलर्स और ज्वेलर्स पर पड़ता है जो कानूनी तरीके से कारोबार करते हैं. यानी सोने की बढ़ती तस्करी सिर्फ सरकार के लिए राजस्व का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे बुलियन और ज्वेलरी कारोबार में प्रतिस्पर्धा और कीमतों के संतुलन को भी प्रभावित कर रही है.

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