जबलपुर : जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) ने अपनी स्थापना के 62 साल बाद पहली बार पूर्व छात्र मिलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। सालों बाद मिले पुराने सहपाठियों के मिलने पर हंसी-ठहाके गूंजे, लेकिन इस दौरान विश्वविद्यालय की कुछ अव्यवस्थाओं को देखकर पूर्व छात्र दुखी भी नजर आए। इस गरिमामयी आयोजन में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री लखन पटेल और पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया भी विशेष रूप से पहुंचे। देश भर से 200 से ज्यादा कृषि वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जो कभी इसी संस्थान से पढ़ाई कर चुके हैं। बता दें कि 1 अक्टूबर 1964 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जबलपुर में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी थी।
🏛️ छह कृषि कॉलेज और 26 रिसर्च स्टेशनों से हुई थी शुरुआत
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के समय छह सरकारी कृषि महाविद्यालय, दो पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय और 26 अनुसंधान केंद्रों (Research Stations) को इसके अंतर्गत लाया गया था। इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना अमेरिका के प्रसिद्ध ‘Land Grant University’ मॉडल की तर्ज पर की गई थी। स्थापना के समय यह देश का सबसे बड़ा कृषि विश्वविद्यालय था। बाद में जेएनकेवीवी के अध्ययन केंद्रों को स्वतंत्र विश्वविद्यालयों में बदला गया, जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर और नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर जैसे नए संस्थान अस्तित्व में आए।
🛠️ कुलपति से चर्चा कर तैयार किया जाएगा मांगपत्र: मंत्री लखन पटेल
कार्यक्रम में शामिल हुए आनंद विभाग के राज्य मंत्री लखन पटेल ने चिंता जताते हुए कहा, “आज जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की भौतिक स्थिति ठीक नहीं है। यहां प्रोफेसर्स और लेक्चरर्स की भारी कमी है तथा यूनिवर्सिटी में कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इसकी वजह से यहां शोध और शिक्षा का काम सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। हम जल्द ही कुलपति के साथ चर्चा करके एक विस्तृत मांगपत्र तैयार करेंगे, जिसे राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा ताकि व्यवस्थाओं में सुधार हो सके।”
🌾 1,544 हेक्टेयर में फैला है कृषि विश्वविद्यालय का दायरा
विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, JNKVV के पास वर्तमान में करीब 1,544 हेक्टेयर (यानी लगभग 3,815 एकड़) विशाल भूमि उपलब्ध है। इसका मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय जबलपुर के अधारताल स्थित कृषि नगर में स्थित है। वर्तमान में प्रदेश के 25 जिलों में इसके कॉलेज, अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। विश्वविद्यालय से 7 कृषि महाविद्यालय, एक हॉर्टिकल्चर कॉलेज और एक कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, 4 जोनल कृषि अनुसंधान केंद्र, 4 क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, 4 कृषि अनुसंधान स्टेशन और 20 कृषि विज्ञान केंद्र भी इसके दायरे में आते हैं।
📚 कृषि से लेकर फॉरेस्ट्री और इंजीनियरिंग तक की होती है पढ़ाई
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर फॉरेस्ट्री, एग्रोनॉमी, एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स, एंटोमोलॉजी, एग्रीकल्चर एक्सटेंशन, जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग, प्लांट पैथोलॉजी और सॉइल साइंस जैसे तमाम महत्वपूर्ण विषयों में उच्च स्तरीय अध्ययन और शोध कार्य होता है। कृषि इंजीनियरिंग के तहत सॉइल एंड वॉटर कंजर्वेशन इंजीनियरिंग जैसे विशेष कोर्स भी संचालित किए जाते हैं। इस संस्थान में गेहूं, धान, सोयाबीन, ज्वार, कोदो और कुटकी जैसे कई प्रमुख अनाजों पर अभूतपूर्व शोध हुए हैं, और यहां से विकसित कई नई वैराइटीज का सीधा लाभ किसानों को मिला है।

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