शिवपुरी। मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आने वाले शिवपुरी के ऐतिहासिक नरवर किले के कचहरी महल से 15 जुलाई की रात चोरी हुई अष्टधातु की अमूल्य तोप का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। स्थिति यह है कि नरवर पुलिस सहित खुद राजस्थान पुलिस भी करौली जिले के उस ‘गावड़ी’ गांव में प्रवेश करने से कतरा रही है, जहां यह तोप छिपी होने का पूरा अंदेशा जताया जा रहा है। नरवर पुलिस इस मामले में अब तक कुल 40 आरोपियों को नामजद कर चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से अभी तक केवल तीन ही आरोपी पुलिस की पकड़ में आ पाए हैं। पुलिस को मुख्य रूप से उन पांच शातिर आरोपियों की तलाश है, जिनके नाम तोप को खपाने और छिपाने के संबंध में गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने बताए हैं।
🎯 राजस्थान के गावड़ी गांव में तोप छिपाए जाने का गहरा अंदेशा
नरवर पुलिस का मानना है कि मीणा और गुर्जर समाज के गांवों के बीच आपसी तनाव न बढ़ जाए, इसलिए राजस्थान पुलिस का सहयोग भी इस मामले में केवल औपचारिकता तक ही सीमित रह पा रहा है। नरवर थाना प्रभारी अरुण प्रताप सिंह का कहना है कि इस सनसनीखेज मामले में अब तक तीन आरोपी—अमन मीणा (निवासी हिंडौन), टिंपू राम और लोकेश मीणा (निवासी गांवड़ा मीणा)—पकड़े जा चुके हैं। पुलिस का पुख्ता अंदेशा है कि चोरी गई तोप करौली के गावड़ी गांव में ही छिपाई गई है। यदि राजस्थान पुलिस का मजबूत और ठोस सहयोग मिल जाए, तो गांव के भीतर दबिश देकर आरोपियों को आसानी से दबोचा जा सकता है।
🚧 पुलिस के पहुंचते ही रास्ते कर देते हैं बंद, गावड़ी गांव में कड़ा पहरा
राजस्थान के करौली जिले में मीणा समाज के करीब 28 गांव ऐसे हैं, जिनका पड़ोसी गुर्जर समाज के गांवों से पानी और अन्य कई गंभीर मामलों को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। वर्तमान में भी वहां स्थानीय स्तर पर आंदोलन और प्रदर्शन का दौर जारी है। ऐसे संवेदनशील गांवों से राजस्थान पुलिस के लिए भी किसी संदिग्ध को उठाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। गांव के लोग पुलिस के आने की भनक लगते ही चारों तरफ के रास्ते पूरी तरह बंद कर देते हैं और गांवों में कड़ा पहरा व चौकसी रखते हैं। कुछ दिन पहले जब नरवर पुलिस दबिश देते हुए गावड़ी गांव के पास तक पहुंची थी, तब वहां दो लोग पुलिस के हाथ लगे थे। हालांकि, उनमें से लोडिंग वाहन का मालिक तो पकड़ लिया गया था, लेकिन दूसरे आरोपी को ग्रामीणों ने भारी हंगामा कर जबरन छुड़ाकर भगा दिया था।
⚖️ पड़ोसी समाज को डराने के लिए रची गई थी तोप चोरी की साजिश
तोप चोरी के पीछे जो मुख्य कारण सामने आया है, उसके अनुसार गांवड़ा के मीणा समाज के लोगों ने पड़ोसी गांव के गुर्जर समाज के लोगों को भयभीत करने के लिए इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया था। दोनों पक्षों के बीच स्थानीय बांध के पानी को लेकर लंबे समय से तनातनी चली आ रही है। प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि पूरे गांव ने मिलकर तोप चुराने की एक बड़ी प्लानिंग बनाई थी और तोप चुराने का फैसला एक स्थानीय पंचायत में लिया गया था। यही वजह है कि पुलिस कार्रवाई के विरोध में पूरा गांव एकजुट होकर आरोपियों की ढाल बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे तोप चोरी के इस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रहे हैं और उनकी टीमें कई बार करौली का दौरा कर चुकी हैं। पुलिस जल्द ही चोरी गई तोप का पता लगाकर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने का दावा कर रही है।

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