श्योपुर: श्योपुर जिले की बड़ौदा तहसील के रतोदन रोड स्थित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावास की तस्वीरें सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। छात्रावास के एक कमरे की छत पूरी तरह गिर चुकी है, जबकि कई अन्य कमरे भी जर्जर और क्षतिग्रस्त हालत में हैं। इसके अलावा शौचालयों की स्थिति भी बेहद बदहाल है। इन सबके बावजूद मजबूर छात्र इसी खतरनाक परिसर में रहने को विवश हैं। गौरतलब है कि जिला कलेक्टर ने कुछ दिन पहले ही सभी छात्रावासों के निरीक्षण के कड़े निर्देश दिए थे।
🏚️ कमरे जर्जर और छत गिरने के बाद भी जान जोखिम में डालकर रह रहे बच्चे
मिली जानकारी के मुताबिक, छात्रावास के एक कमरे की छत पूरी तरह ढह चुकी है। अन्य कमरों की दीवारों में भी बड़ी-बड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। बारिश के मौसम में इस जर्जर भवन में रहना बच्चों के लिए और भी ज्यादा जोखिम भरा हो जाता है। आसपास जलभराव और भवन की कमजोर स्थिति के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। छात्रों का कहना है कि जर्जर भवन के कारण उन्हें आसपास के गांवों में रहने के लिए कहा जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है।
🔍 किसान नेता ने उठाए सवाल: “जब नया छात्रावास तैयार है, तो पुराने भवन में क्यों?”
मौके पर पहुंचे किसान नेता राधेश्याम मीणा मुंडला ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा, “यदि नया छात्रावास बनकर तैयार हो चुका है, तो बच्चों को इस जर्जर और खतरनाक भवन में रखने का क्या औचित्य है? बड़ौदा के वार्ड क्रमांक 11 में एससी-एसटी विद्यार्थियों के लिए नया छात्रावास पूरी तरह तैयार है।”
⚠️ निरीक्षण व्यवस्था सवालों के घेरे में, छात्रों ने लगाई गुहार
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल छात्रावास की जर्जर स्थिति से ज्यादा प्रशासनिक निरीक्षण व्यवस्था को लेकर है। यदि प्रशासन के निर्देश पर छात्रावास का औचक निरीक्षण किया गया था, तो जर्जर छत, क्षतिग्रस्त कमरे और बदहाल शौचालय निरीक्षण रिपोर्ट में सामने क्यों नहीं आए? छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने दर्द बयां करते हुए कहा, “हमें यहां भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिल्डिंग की छत कभी भी गिर सकती है, और बाथरूम भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। हम हर पल डर के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हमारा कलेक्टर मैडम से विनम्र निवेदन है कि हमें जल्द से जल्द सुरक्षित नए भवन में शिफ्ट कराया जाए।”
🗣️ ट्राइबल विभाग के अधिकारी की सफाई
वहीं, इस पूरे मामले पर अनुसूचित जनजाति विभाग के सहायक आयुक्त आरके गुप्ता ने सफाई देते हुए कहा, “पूरा छात्रावास जर्जर नहीं है, बल्कि पीछे का केवल एक कमरा जर्जर स्थिति में है, जो काफी दिनों से बंद है और मुख्य भवन से दूर है। हाउसिंग बोर्ड द्वारा एक नया छात्रावास बनाया गया है, जो ट्राइबल विभाग का है। हालांकि, अभी उसका आधिकारिक हैंडओवर नहीं हुआ है, लेकिन इसको लेकर बातचीत जारी है। आगामी दो-चार दिनों के भीतर बच्चों को नए भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा।”

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