August 14, 2026

News Prawah

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Jabalpur High Court News: 40 साल की सेवा के बाद भी लाभ से वंचित शिक्षक को राहत, कोर्ट ने शासन के आदेश को नकारा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ ने शिक्षकों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के शिक्षकों को उनकी पात्रता की वास्तविक तिथि से ही तृतीय और चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ प्रदान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने शासन को निर्देश दिए हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को आगामी 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। यह फैसला उन तमाम शिक्षकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो वर्षों की लंबी सेवा के बाद भी क्रमोन्नति के लाभ से वंचित चल रहे थे।

📜 शासन के आदेश को दी गई थी चुनौती, नियुक्ति तिथि से सेवा गणना के निर्देश

यह पूरा मामला 40 साल की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए छतरपुर के सहायक शिक्षक राजकुमार पटेरिया द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिन्हें चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिया जा रहा था। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मनोज चंसौरिया ने शासन के उन परिपत्रों और आदेशों की शर्तों को चुनौती दी थी, जिनके तहत क्रमोन्नति के लाभ को एक निश्चित तारीख से प्रभावी माना जा रहा था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि तृतीय व चतुर्थ क्रमोन्नति का वेतनमान कर्मचारी की नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना के आधार पर 30 व 35 वर्ष पूर्ण होने पर देय होगा, न कि शासन के परिपत्रों में वर्णित किसी अन्य निर्धारित तिथि से।

🔍 कृष्ण वल्लभ मकवाना मामले का दिया गया हवाला, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता द्वारा पूर्व के एक महत्वपूर्ण फैसले यानी ‘कृष्ण वल्लभ मकवाना बनाम मप्र शासन’ मामले का हवाला दिया गया, जिसमें यह तय किया जा चुका है कि 30 या 35 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए, भले ही वह संबंधित परिपत्र जारी होने से पहले ही सेवानिवृत्त क्यों न हो चुका हो। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के मामले में क्रमोन्नति पर विचार उसकी पात्रता की तारीख से ही किया जाए। इस निर्णय से प्रदेश के अन्य सेवानिवृत्त और सेवारत शिक्षकों के लिए भी न्याय का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

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