मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बालाघाट जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जिले के कई गांवों में फैली खतरनाक बीमारियों की वजह से पिछले डेढ़ महीने के भीतर 10 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद ग्रामीण इलाकों में भारी दहशत और घबराहट का माहौल है। इस प्रकोप की चपेट में मुख्य रूप से मछुरदा, अडोरी, गठिया, बोंदारी, कोरका, कोहनीमोर और कुण्डेकसा जैसे आदिवासी गांव आ चुके हैं। इन क्षेत्रों में बच्चों में मलेरिया, टायफाइड, डायरिया और गंभीर त्वचा संबंधी बीमारियों के लक्षण तेजी से फैल रहे हैं। बच्चों की लगातार हो रही इन मौतों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है, जिसके चलते कुण्डेकसा गांव में सरकारी स्कूल को ही एक अस्थायी अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है।
🩺 बालाघाट और जबलपुर से पहुंची हेल्थ टीमें, 2100 से अधिक लोगों की हुई स्क्रीनिंग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित गांवों में बालाघाट के अलावा जबलपुर से भी विशेष स्वास्थ्य टीमों को तुरंत रवाना किया गया है। इन टीमों द्वारा घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक गंभीर स्थिति वाले 128 बच्चों को अस्पताल भेजा गया था, जिनमें से 97 बच्चों का सफल इलाज कर उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 31 बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। इसके अलावा, कुल 2100 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें से 530 मरीजों में विभिन्न बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार लोगों को मच्छरों से बचने, उबला या स्वच्छ पानी पीने और बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है।
🏛️ मौत के आंकड़ों पर सियासत तेज: विधायक ने लगाए आंकड़े छिपाने के आरोप, कलेक्टर ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर राजनीतिक सरगर्मी भी काफी तेज हो गई है। स्थानीय विधायक संजय उईके ने जिला प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रशासन बच्चों की मौत के असली आंकड़े छुपा रहा है, जबकि उनके पास मौजूद जानकारी के मुताबिक अब तक कुल 19 बच्चों की मौत हो चुकी है। उन्होंने मृत बच्चों के नाम उजागर करते हुए पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, बालाघाट कलेक्टर कुमार सत्यम ने विधायक के इन दावों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि सूची में बताए गए कुछ नाम काफी पुराने हैं और हर मौत का कारण मौसमी बीमारी नहीं है। कलेक्टर के मुताबिक, हाल ही में जिन मामलों की पुष्टि हुई है, उनमें मौसमी बीमारियों से अब तक कुल 8 मौतें हुई हैं, और प्रशासन स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है।

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