गुना। देश भर में 14 सितंबर से शुरू हो रहे गणेश उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। सोमवार से शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणेशोत्सव के अवसर पर प्राचीन मंदिरों में साज-सज्जा का कार्य अंतिम चरण में है।
बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इस पावन पर्व को लेकर बेहद उत्साहित हैं। गुना जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर आरोन बायपास रोड पर स्थित अति प्राचीन ‘मंशापूर्ण वक्र गणेश मंदिर’ अपने अद्भुत विग्रह और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे मध्य प्रदेश में जाना जाता है।
🐘 एक ही स्थान पर विराजित हैं दो प्रतिमाएं: मुंबई के सिद्धिविनायक जैसा दिखता है एक स्वरूप
गुना जिले का यह सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है, जिसके लगभग 1,000 साल पुराना होने का दावा किया जाता है। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक साथ दो गणेश प्रतिमाएं विराजमान हैं।
इनमें से एक प्रतिमा अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ है, जबकि दूसरी प्रतिमा का भव्य स्वरूप मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर जैसा प्रतीत होता है। गणेश चतुर्थी और संकट चतुर्थी जैसे अवसरों पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।
🏰 मूसागढ़ और जयगढ़ किले का ऐतिहासिक संबंध: आरटीआई एक्टिविस्ट ने साझा की मंदिर की प्राचीनता
समाजसेवी और आरटीआई एक्टिविस्ट राहुल जैन के अनुसार, यह मंदिर 16वीं से 17वीं शताब्दी के दौर की समृद्ध विरासत को समेटे हुए है। वर्तमान में जिस क्षेत्र को बजरंगगढ़ के नाम से जाना जाता है, वह पूर्व में ‘मूसागढ़’ नाम से प्रसिद्ध था।
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, किले के नीचे बसी आबादी को बजरंगगढ़ कहा जाने लगा, जबकि मूल किले का ऐतिहासिक नाम ‘जयगढ़’ हुआ करता था।
🟡 हल्दी की माला चढ़ाने से दूर होती हैं विवाह की रुकावटें: तीन पीढ़ियों से सेवा कर रहा है पुजारी परिवार
मंदिर के मुख्य पुजारी वेंकटेश भार्गव ने बताया कि उनका परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से निरंतर भगवान गणेश की सेवा-अर्चना में जुटा हुआ है। संकट चतुर्थी पर यहां नारियल का विशेष यज्ञ आयोजित किया जाता है।
पुजारी के अनुसार, जिन युवाओं के विवाह में बार-बार बाधाएं आती हैं, वे यदि श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश को 51 या 108 हल्दी की मालाएं अर्पित करते हैं, तो उनकी सभी समस्याएं शीघ्र समाप्त हो जाती हैं और विवाह का मार्ग सुगम हो जाता है।
🐭 मूषक पर सवार हैं गणपति बप्पा: मस्तक पर सर्प और हाथों में धारण किए हैं विशेष अस्त्र
आमतौर पर गणेश प्रतिमाओं में मूषक को उनके वाहन के रूप में पास में बैठा दिखाया जाता है, लेकिन इस मंदिर का विग्रह बेहद अनोखा है क्योंकि यहां भगवान गणेश सीधे मूषक के ऊपर सवार हैं।
भगवान गणेश अपनी अलग-अलग भुजाओं में मोदक/लड्डू, कालदंड, फरसा और रुद्राक्ष की माला धारण किए हुए हैं, साथ ही चंद्रमा भी विराजमान हैं। उनके मस्तक पर सर्प सुशोभित है। गणेश चतुर्थी और अष्टमी पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

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