September 13, 2026

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Eco Friendly Ganesha 2026: न नदी न तालाब, गमले में विसर्जन! उज्जैन में गोबर के बप्पा से पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल

उज्जैन। एक हाथ में 6-7 इंच की सुंदर गणेश प्रतिमा और सामने नदी या तालाब के बजाय एक पौधा और गमला—72 वर्षीय श्याम माहेश्वरी पिछले 12 सालों से गणेश उत्सव की इस तस्वीर को बदलने की मुहिम में जुटे हुए हैं। उनका संदेश बेहद स्पष्ट और प्रभावी है: ‘गणेश जी के प्रति आस्था भी रहे और हमारी प्रकृति भी सुरक्षित रहे।’

पेशे से हैंडलूम व्यापारी और जैविक खेती से जुड़े श्याम माहेश्वरी गाय के गोबर से निर्मित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं अपने निजी खर्चे पर लोगों को बिल्कुल मुफ्त बांटते हैं। 12 साल पहले महज 100 प्रतिमाओं से शुरू हुआ यह पावन सिलसिला अब 2026 में 1000 से अधिक परिवारों तक पहुंच चुका है। उनके लिए यह केवल प्रतिमा बांटना नहीं, बल्कि प्रकृति को सहेजने का एक महाभियान है।

🪔 100 प्रतिमाओं से हुई थी इस वैचारिक यात्रा की शुरुआत: 2026 में अपने खर्च पर तैयार कराईं 1000 प्रतिमाएं

इस मुहिम की शुरुआत करीब 12 साल पहले हुई थी। श्याम माहेश्वरी बताते हैं कि उनके प्रेरणा स्रोत पंडित श्याम नारायण व्यास ने उन्हें पहली बार गोबर से बनी 100 इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं मुफ्त दी थीं। उस समय एक प्रतिमा की लागत महज 5 रुपये थी।

उन प्रतिमाओं के साथ मिले इस विचार ने उनके मन को छू लिया और उन्होंने ठान लिया कि गणेश उत्सव को प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना मनाया जाना चाहिए। साल 2026 में 1000 परिवारों तक बप्पा की गोबर से बनी 6 से 7 इंच की प्रतिमाएं पहुंचाने के लिए उन्होंने अपने स्तर पर 20,000 रुपये खर्च किए हैं। वे प्रतिमा लेने वाले हर परिवार से आग्रह करते हैं कि वे अपने आसपास भी पर्यावरण जागरूकता का यह संदेश अवश्य फैलाएं।

🪴 गमले में करें विसर्जन, उगेगा तुलसी का पौधा: जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की अभिनव पहल

श्याम माहेश्वरी की अपील है कि लोग इको-फ्रेंडली प्रतिमा को नदी, तालाब या अन्य सार्वजनिक जल स्रोतों में विसर्जित करने के बजाय अपने घर के गमले, बगीचे या पेड़-पौधों के पास मिट्टी में रखकर पानी दें।

पानी के संपर्क में आते ही गोबर से बनी यह प्रतिमा महज 30 मिनट के भीतर पूरी तरह घुलकर मिट्टी में मिल जाती है। इसके साथ ही श्याम माहेश्वरी वर्ष 2027 से इन प्रतिमाओं के निर्माण में तुलसी के बीज मिलाने की योजना बना रहे हैं, जिससे विसर्जन के स्थान पर एक नया हरा-भरा पौधा अंकुरित हो सकेगा।

👦 ‘एक गणेश प्रतिमा, एक पौधा और एक साल की जिम्मेदारी’: नागरिकों ने सराही श्याम माहेश्वरी की पहल

प्रतिमा लेने पहुंचे विट्ठल नागर ने कहा, “श्याम माहेश्वरी जी से प्रतिमा लेकर मेरे मन में विचार आया कि हर परिवार को एक प्रतिमा के साथ एक पौधा अपनाना चाहिए। विसर्जन के बाद साल भर बच्चे उस पौधे की देखभाल करें, उसकी ऊंचाई नापें और तस्वीरें लें। इससे 10 दिन का गणेश उत्सव 1 साल की पर्यावरणीय जिम्मेदारी में बदल जाएगा।”

वहीं महाकाल वाणिज्य निवासी आरती खरे ने कहा कि, “इस ‘श्याम मॉडल’ को हर शहर में अपनाया जा सकता है। गौशालाओं से गोबर, स्थानीय कुम्हारों से निर्माण और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से इसे घर-घर तक पहुंचाकर व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।”

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