शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में गणेश चतुर्थी के पावन पर्व को लेकर बाजारों में जबरदस्त रौनक और उत्साह देखने को मिल रहा है। जगह-जगह गणपति बप्पा की सुंदर मूर्तियों के स्टॉल सजाए गए हैं, जहां श्रद्धालु अपनी पसंद की प्रतिमाएं खरीदने पहुंच रहे हैं। इस बार शहडोल में बाहरी जिलों से भी मूर्तिकार खुद प्रतिमाएं बनाकर बेचने पहुंचे हैं।
जबलपुर के कुंडम निवासी मूर्तिकार आसाराम ने बताया कि वे अपने पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाते हुए हर साल शहडोल आते हैं, क्योंकि यहां मूर्तियों की अच्छी मांग रहती है और सही दाम मिल जाता है। उनके पास 200 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक की सुंदर गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें खरीदने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
🗓️ तृतीया और चतुर्थी तिथि का दुर्लभ संयोग: ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री से जानें मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी पर बहुत ही शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जहां तृतीया और चतुर्थी तिथि एक ही दिन पड़ रही हैं। तृतीया तिथि सुबह 7:14 बजे तक रहेगी, जिसके तुरंत बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
मूर्ति स्थापना के लिए दिन भर में 3 विशेष शुभ मुहूर्त रहेंगे:
- प्रथम मुहूर्त (सुबह): प्रातः 9:00 बजे से 11:00 बजे तक।
- द्वितीय मुहूर्त (दोपहर): दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक।
- तृतीय मुहूर्त (संध्या): शाम 7:00 बजे से रात 10:00 बजे तक।
🌾 पीले चावल से दें बप्पा को निमंत्रण: जानें किस रंग की मूर्ति घर लाना होगा अत्यंत फलदायी
पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री ने बताया कि जब भी आप बाजार में गणेश जी की मूर्ति खरीदने जाएं, तो अपने साथ थोड़े से पीले चावल (अक्षत) जरूर ले जाएं। जिस प्रतिमा को आप अपने घर ले जाना चाहते हैं, उसे वहीं पीले चावल अर्पित कर श्रद्धापूर्वक घर आने का निमंत्रण दें और चावल वहीं छोड़ दें।
शास्त्रों के अनुसार, पीले रंग की गणेश प्रतिमा घर लाना सबसे अधिक शुभ माना गया है। इसके अलावा लाल या सफेद रंग की प्रतिमा भी स्थापित की जा सकती है।
🌺 मंत्रोच्चार के साथ ऐसे करें गणपति की स्थापना: अर्पित करें बप्पा के प्रिय पुष्प
गणपति बप्पा को घर लाने के बाद शुभ मुहूर्त में स्थापना स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। इसके बाद एक लकड़ी की चौकी (पटा) पर लाल या पीला स्वच्छ कपड़ा बिछाकर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चंदन, वंदन, धूप, दीप और मोदक/लड्डू का भोग लगाएं। इस बार बप्पा को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा में पीले रंग के फूल, गुलाब और चंपा के पुष्प विशेष रूप से अर्पित करें, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।

More Stories
Eco Friendly Ganesha 2026: न नदी न तालाब, गमले में विसर्जन! उज्जैन में गोबर के बप्पा से पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल
MP Maihar Collector Action: मैहर कलेक्टर ने बच्चों को पढ़ाया संविधान और साइंस का पाठ, अनुपस्थित शिक्षकों को नोटिस
Tikamgarh Antaura Village: न बिकती है न पीते हैं! हनुमान मंदिर में पंचायत का ऐतिहासिक फैसला, वापस लौटा गांव का अमन-चैन