टीकमगढ़। देश और प्रदेश के बड़े व छोटे शहरों में जहां शराब पार्टी करना एक स्टेटस सिंबल या क्रेज माना जाता है, वहीं मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के एक छोटे से गांव अंतौरा से बिल्कुल विपरीत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है।
हाल ही में सागर जिले में हुए शराब कांड के बीच अंतौरा गांव की यह पहल पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गई है। यहां पिछले 3 साल से ग्रामीणों ने शराब से पूरी तरह तौबा कर ली है। यह सब संभव हुआ है ग्राम पंचायत और ग्रामीणों के एक ऐतिहासिक फैसले से, जिसने गांव में सुरक्षा और शांति का माहौल पूरी तरह बहाल कर दिया है। यहां न तो वैध शराब मिलती है और न ही अवैध शराब, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना चुकाना पड़ता है।
📜 पीने वाले पर 11 हजार और बेचने वाले पर 21 हजार का जुर्माना: हनुमान मंदिर प्रांगण में लिया गया था ऐतिहासिक फैसला
लगभग 5000 की जनसंख्या और 1800 मतदाताओं वाले इस गांव में 3 साल पहले शुरू हुआ बदलाव आज भी पूरी मजबूती से कायम है। (इस पंचायत में भदौरा गांव भी शामिल है, जिससे कुल मतदाता लगभग 2400 हैं)।
सरपंच पुष्पेंद्र यादव ने बताया कि गांव में बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए प्रसिद्ध हनुमान मंदिर प्रांगण में सर्वसमाज की पंचायत बुलाई गई थी। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शराब पीने और बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। नियम बनाया गया कि गांव में शराब पीकर उत्पात मचाने वाले पर 11,000 रुपये और अवैध शराब बेचने वाले पर 21,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह कड़ा नियम आज भी गांव में लागू है।
⚖️ जिसने तोड़ा नियम, उसे देना पड़ा जुर्माना: ग्रामीणों की अटूट एकजुटता के आगे झुके नियम तोड़ने वाले
स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि 3 साल पहले शराबियों से तंग आकर ग्रामीणों ने यह सामूहिक कदम उठाया था।
शुरुआत में कुछ असामाजिक तत्वों ने नियम को तोड़ने और अवहेलना करने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता और सख्ती के सामने किसी की न चली। मंदिर समिति और ग्रामीणों ने बिना किसी भेदभाव के नियम तोड़ने वालों से तय जुर्माना वसूल किया, जिसके बाद सभी ने नियम का पालन करना शुरू कर दिया।
🛕 जुर्माने की राशि हनुमान मंदिर समिति को समर्पित: मंदिर के विकास कार्यों में हो रहा इस्तेमाल
स्थानीय निवासी मनोहरलाल यादव ने बताया कि नियम बनाना आसान था, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करना एक बड़ी चुनौती थी।
इसलिए यह व्यवस्था बनाई गई कि वसूला गया जुर्माना हनुमान मंदिर समिति के कोष में जमा किया जाएगा। इस राशि का उपयोग मंदिर के जीर्णोद्धार और सामाजिक-धार्मिक विकास कार्यों में किया जा रहा है। जुर्माने के इस पारदर्शी तंत्र के कारण लोग डर और सम्मान दोनों वजहों से नियम का पालन कर रहे हैं।
🏚️ कभी शाम ढलते ही गूंजती थीं गालियां और मारपीट: बिखर रहे थे परिवार और बच्चों की पढ़ाई
अतीत के माहौल को याद करते हुए सरपंच पुष्पेंद्र यादव ने बताया कि 5 साल पहले गांव की स्थिति बेहद चिंताजनक थी। शाम ढलते ही अवैध शराब के अड्डों पर भीड़ जुट जाती थी। शराब के नशे में गलियों में गाली-गलौज, मारपीट और घरेलू हिंसा आम बात हो गई थी।
स्थानीय महिला अंगूरी वंशकार ने बताया कि शराबी घर का अनाज और जमा-पूंजी तक बेच देते थे। विरोध करने पर महिलाओं के साथ मारपीट होती थी, बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा था और कई महिलाएं तंग आकर मायके रहने चली जाती थीं।

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