उमरिया। वन्यजीवों का दीदार करने के लिए मध्य प्रदेश दुनिया भर के पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। प्रदेश में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं, जहां बाघों के साथ-साथ कई दुर्लभ वन्यजीवों और पक्षियों को देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक आते हैं।
इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 1 अक्टूबर से नया पर्यटन सीजन 2026-27 शुरू होने जा रहा है, जिसको लेकर पार्क प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
📚 ‘जंगल की बातों की पाठशाला’ में तैयार हो रहे गाइड्स: केवल सफारी नहीं, जंगल का इतिहास भी बताएंगे
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस बार पर्यटकों को सिर्फ बाघों का दीदार कराने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें जंगल की कहानी, वन्यजीवों के व्यवहार, जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत से भी रूबरू कराया जाएगा।
इसके लिए पार्क प्रबंधन गाइड्स को एक नए और खास अंदाज में प्रशिक्षित कर रहा है। इसी उद्देश्य से चलाई जा रही ‘जंगल की बातों की पाठशाला’ का प्रशिक्षण कार्यक्रम अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। इस योजना के तहत करीब 200 गाइड्स को अलग-अलग बैच में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
🌲 जंगल और टूरिस्ट के बीच ‘पर्यावरण दूत’ बनेंगे गाइड: क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बढ़ाया उत्साह
इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य गाइड्स को ऐसा व्यावहारिक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है, जिससे वे केवल सफारी संचालक न रहकर जंगल और पर्यटकों के बीच एक मजबूत कड़ी और पर्यावरण के दूत के रूप में कार्य कर सकें।
11 और 12 सितंबर को इस पाठशाला के 6वें बैच का दो दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें 26 गाइड्स ने हिस्सा लिया। ट्रेनिंग के दौरान क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने गाइड्स से सीधा संवाद कर उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि “गाइड्स ही बांधवगढ़ की असली शान हैं। उनका ज्ञान, आचरण और पर्यटकों से संवाद करने की शैली ही इस रिजर्व की विश्वस्तरीय छवि को बनाए रखती है।”
🐾 ताला जोन में फील्ड विजिट और पग मार्क पहचान की सीख: कुल 7 बैच में दी जा रही है ट्रेनिंग
प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों ने गाइड्स को पूरे इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की बारीकियां समझाने के साथ-साथ बर्ड वाचिंग (पक्षी दर्शन), वन्यजीवों के स्वभाव, संवाद शैली, व्यक्तित्व विकास और ग्रूमिंग के गुर सिखाए।
इसके अलावा ताला जोन में गाइड्स को फील्ड विजिट कराकर बाघों के पग मार्क (पंजों के निशान) की पहचान और नेचर इंटरप्रिटेशन का व्यावहारिक अनुभव कराया गया। क्षेत्र संचालक ने बताया कि इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए कुल 7 बैच निर्धारित किए गए हैं।
🗓️ 14 सितंबर को अंतिम बैच की ट्रेनिंग: 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खुलेंगे पार्क के गेट
निर्धारित 7 में से 6 बैचों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जबकि 7वें और अंतिम बैच की ट्रेनिंग 14 सितंबर को आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही गाइड्स के इस विशेष प्रशिक्षण अभियान का समापन हो जाएगा।
इसके बाद 1 अक्टूबर से जब बांधवगढ़ के पर्यटन जोन आम पर्यटकों के लिए खोले जाएंगे, तब सफारी की पगडंडियों पर गाइड्स एक नई और प्रभावी भूमिका में नजर आएंगे। पार्क प्रबंधन की कोशिश है कि पर्यटक बांधवगढ़ से सिर्फ बाघों की तस्वीरें लेकर न लौटें, बल्कि जंगल को गहराई से समझने और प्रकृति को महसूस करने का एक अविस्मरणीय अनुभव भी साथ लेकर जाएं।

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