उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद मंगलवार सुबह से ही सिवनी स्थित निवास पर भाजपा पदाधिकारियों और उत्साही कार्यकर्ताओं का तांता लग गया। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और फूलमालाओं के साथ डॉ. ढाल सिंह बिसेन का भव्य स्वागत किया। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए डॉ. बिसेन ने भावुक और उत्साहित अंदाज में कहा कि “देवभूमि उत्तराखंड को देवों की भूमि कहा जाता है। मुझे वहां की सेवा का जो दायित्व सौंपा गया है, वह निश्चित रूप से मेरा सौभाग्य है। ऐसी पावन भूमि पर जाकर मुझे देश और समाज की सेवा करने का अनूठा अवसर मिलेगा।”
🙏 प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री का जताया आभार: नवरात्रि में मिली सौगात को बताया गौरव का क्षण
डॉ. बिसेन ने अपनी इस बड़ी उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति, पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष, संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अनगिनत लोगों का स्नेह और सहयोग उनके साथ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप आज यह मुकाम हासिल हुआ है। शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों में मिली इस बड़ी खुशखबरी से अभिभूत डॉ. बिसेन ने कहा कि पार्टी के इस निर्णय से वे खुद को बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी व लगन के साथ इस संवैधानिक पद की जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
📜 विधायक से लेकर राज्यपाल तक का सफर: ऐसा रहा है डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक जीवन
सिवनी जिले के पिपरिया निवासी डॉ. ढाल सिंह बिसेन (जन्म 14 मई 1952) पेशे से चिकित्सक एवं कृषक रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर बेहद शानदार और संघर्षशील रहा है। वे वर्ष 1990 में पहली बार मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए और इसके बाद 1993, 1998 तथा 2003 में लगातार विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2003 की भाजपा सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रहे और वन, परिवहन, खनिज, स्कूल शिक्षा व जेल जैसे महत्वपूर्ण विभागों की बागडोर संभाली। इसके बाद 2012 से 2013 तक राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष रहे। वर्ष 2019 में वे बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र से भारी मतों से सांसद चुने गए और अंततः 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आदेश के बाद उन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

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