बुरहानपुर। गणेश चतुर्थी एवं गणेशोत्सव के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में काशी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट की आध्यात्मिक संस्कृति और समृद्धि का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। यहाँ ‘रास्तीपुरा के राजा’ गणेशोत्सव समिति के युवाओं ने लगभग डेढ़ महीने की अथक मेहनत के बाद काशी की विश्वप्रसिद्ध ‘मणिकर्णिका घाट’ की थीम पर आधारित अत्यंत भव्य और सजीव झांकी तैयार की है। इस अनूठी झांकी के माध्यम से समाज को एक सकारात्मक और गहरा आध्यात्मिक संदेश देने का प्रयास किया गया है। बुरहानपुर में इस साल कई गणेश मंडलों ने देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की प्रतिकृतियाँ तैयार की हैं, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
🚩 महाराष्ट्र समेत पड़ोसी राज्यों से पहुँच रहे श्रद्धालु: देर रात तक लग रहा दर्शनार्थियों का तांता
स्थानीय युवाओं ने पंडाल में एक से बढ़कर एक कलाकृतियाँ बनाकर न केवल धार्मिक स्थल की भव्यता को उकेरा है, बल्कि उसके ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व की सटीक जानकारी भी उपलब्ध कराई है।
इस अद्भुत एवं मनोरम झांकी को देखने के लिए मध्य प्रदेश के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन भारी संख्या में श्रद्धालु बुरहानपुर पहुँच रहे हैं। पंडाल परिसर में सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों और दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।
🛕 उज्जैन महाकाल और केदारनाथ के बाद अब मणिकर्णिका घाट: रास्तीपुरा समिति की सृजनशीलता की सर्वत्र प्रशंसा
रास्तीपुरा की राजा गणेश उत्सव समिति हर वर्ष अपनी अनूठी थीम और रचनात्मकता के लिए पहचानी जाती है।
इससे पूर्व के वर्षों में यह समिति उज्जैन के बाबा महाकाल लोक, छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक रायगढ़ किले और उत्तराखंड के पावन केदारनाथ धाम की भव्य झांकियां बना चुकी है। इस बार मणिकर्णिका घाट की झांकी बनाकर समिति के कलाकारों ने अपनी कला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो इस समय पूरे शहर में मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
🕉️ माँ पार्वती और शिव नगरी से जुड़ा पौराणिक इतिहास: जानिए क्यों पड़ा मणिकर्णिका घाट नाम
झांकी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को मणिकर्णिका घाट से जुड़ी पौराणिक किंवदंतियों और उसके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से समझाया जा रहा है।
समिति के सदस्य मनीष महाजन ने बताया, “मणिकर्णिका घाट मात्र एक तट नहीं, बल्कि साक्षात भगवान शिव की अविनाशी नगरी काशी का हृदय स्थल है। मान्यता है कि यहाँ माता पार्वती की मणिकर्णिका (कान का कुंडल/मणि) गिरी थी, जिसके कारण इस घाट का नाम मणिकर्णिका पड़ा। झांकी के माध्यम से हम समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि इंसान जीवन में चाहे कितनी भी धन-दौलत कमा ले, लेकिन अंतिम सत्य यही घाट है। इसलिए अहंकार और घमंड को त्यागकर सदैव धर्म व जनसेवा के कार्यों में तत्पर रहना चाहिए।”
🌺 श्रद्धालुओं ने महसूस की साक्षात काशी की अनुभूति: स्थानीय युवाओं में भारी उत्साह
पंडाल में पहुँचे युवा दर्शकों और स्थानीय निवासियों ने इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की।
दर्शक अमृता लधवे ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, “वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट अत्यंत पवित्र और सुंदर स्थल है। मैं स्वयं वहाँ जाकर दर्शन कर चुकी हूँ। जिन लोगों को अब तक काशी जाकर मणिकर्णिका घाट देखने का अवसर नहीं मिला है, वे बुरहानपुर के इस पंडाल में आकर साक्षात काशी की दिव्यता और उस पावन घाट की अनुभूति प्राप्त कर सकते हैं।”

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