September 20, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

Burhanpur News Today: बुरहानपुर आयुर्वेदिक अस्पताल में लखपति दीदी कैंटीन; 300 छात्रों और मरीजों को मिल रहा घर जैसा खाना

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अब होटल व कैंटीन व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर ली है। घरेलू उत्पाद बनाकर अपने हुनर का प्रदर्शन करने वाली इन महिलाओं ने करीब डेढ़ महीने पहले पंडित शिवनाथ शास्त्री शासकीय आयुर्वेदिक अस्पताल व कॉलेज में कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी संभाली है। इस नवाचार के माध्यम से क्षेत्र की लगभग 25 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से स्थायी रोजगार मिला है, जिससे वे आत्मनिर्भरता और सफलता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

📈 आमदनी में 3 गुना से अधिक की बढ़ोतरी: 8 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये तक पहुँची मासिक आय

आयुर्वेदिक कॉलेज की कैंटीन में काम करने से समूह से जुड़ी महिलाओं के आर्थिक जीवन में व्यापक और क्रांतिकारी सुधार आया है।

कैंटीन संचालन से पूर्व जिन महिलाओं की मासिक आय महज 8 हजार रुपये के आसपास हुआ करती थी, वह अब बढ़कर 20 हजार से 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुँच चुकी है। आय में इस अभूतपूर्व वृद्धि से समूह की दीदियों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हुई है, जिससे वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ परिवार और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर रही हैं।

👩‍🍳 लखपति दीदी बनने की ओर बढ़ता कदम: शुभम आजीविका मिशन के नेतृत्व में हो रहा संचालन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा बुरहानपुर जिला प्रशासन के सहयोग से यह महत्वपूर्ण पहल की गई है।

मोहम्मदपुरा स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में ‘शुभम आजीविका मिशन’ की अध्यक्षा खुशबू तिवारी के कुशल नेतृत्व में इस कैंटीन का संचालन किया जा रहा है। समूह से जुड़ी 25 महिलाएं अपने घर-परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियाँ निभाने के साथ-साथ अत्यंत कुशलता से कैंटीन का प्रबंधन भी संभाल रही हैं।

🍲 300 विद्यार्थियों, मरीजों और स्टाफ के लिए घर जैसा भोजन: सुबह 9 से शाम 7 बजे तक सेवा

यह कैंटीन रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक संचालित होती है, जहाँ कॉलेज के 300 विद्यार्थियों, शिक्षकों, सहायक स्टाफ और अस्पताल में भर्ती मरीजों को शुद्ध, सुपाच्य भोजन, चाय, नाश्ता एवं दैनिक जरूरत की खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

पूर्व में इन महिलाओं को छोटे-मोटे खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था या खेतों में मजदूरी करनी पड़ती थी। लेकिन अब नियमित मासिक आय मिलने से उनके जीवनस्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। महिलाएं इस बदलाव का श्रेय राज्य शासन व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी नीतियों को दे रही हैं।

💬 मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर: समूह सदस्यों और विद्यार्थियों ने साझा किया अनुभव

समूह सदस्य लक्ष्मी तायड़े ने बताया कि वे पहले खेतों में दिनभर मजदूरी करके मात्र 200 रुपये दिहाड़ी कमा पाती थीं, लेकिन स्व-सहायता समूह से जुड़कर कैंटीन में काम मिलने से उनकी आय कई गुना बढ़ गई है।

वहीं कैंटीन संचालिका एवं समूह अध्यक्ष खुशबू तिवारी ने बताया, “आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद हमें प्रशिक्षण मिला और विभिन्न उत्पाद बनाने सीखे। कॉलेज में कैंटीन संचालन का अवसर मिलने से महिलाओं को स्थायी व दीर्घकालिक रोजगार प्राप्त हुआ है।” दूसरी ओर, कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि परिसर के भीतर ही किफायती दरों पर घर जैसा शुद्ध खाना और नाश्ता मिलने से उन्हें भारी सुविधा हो रही है।

Share to...