September 20, 2026

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Chhindwara Agricultural News: मचान (ढाबा) पर बैठकर 6 महीने के पोते संग फसल की रखवाली; छिंदवाड़ा के किसानों की अनोखी जुगत

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छिंदवाड़ा। लगभग तीन महीने तक खेतों में कड़ी मेहनत और पसीना बहाने के बाद अब किसानों की फसलें पककर पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं। हालांकि, जंगल के समीपवर्ती ग्रामीण अंचलों में पककर तैयार फसलों को जंगली जानवरों और पक्षियों से बचाना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। खासकर पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे गांवों में फसल पकते ही वन्यजीवों का डर बढ़ जाता है। इन विपरीत परिस्थितियों में जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा करने और स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय किसानों ने ‘देसी जुगाड़’ से ढाबा (ऊंचा मचान) तैयार किया है, जिस पर बैठकर किसान पूरे खेत की आसानी से निगहबानी कर रहे हैं।

👶 पोते को गोद में लेकर मचान से रखवाली: जमतरा गांव की महिला किसान कुमरवती की आपबीती

पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित ग्राम जमतरा की महिला किसान कुमरवती अपने खेत के किनारे फसलों से कई फीट ऊंचा ढाबा बनाकर दिनभर फसलों की रखवाली करती हैं।

निगहबानी के दौरान उनके साथ उनका 6 महीने का पोता भी खेलता हुआ नजर आता है। कुमरवती ने बताया, “फसल पकते ही जंगल की ओर से बंदर, जंगली सूअर, हिरण और कभी-कभी बाघ भी खेतों के आसपास आ जाते हैं। जमीन पर रहकर रखवाली करना खतरनाक होता है, इसलिए इन जंगली जानवरों और पक्षियों से फसल व खुद को बचाने के लिए ऊंचे ढाबे (मचान) पर बैठकर रखवाली की जाती है।”

🐅 बाघ के हमले से सुरक्षा का मजबूत आधार: चार बल्लियों पर तैयार किया गया लकड़ी का सुरक्षा कवच

फसलों की रखवाली कर रहे किसान दामोदर काठे ने बताया कि यह ढाबा उनकी सुरक्षा का एक कारगर देसी उपाय है।

उन्होंने कहा, “इस सीमावर्ती क्षेत्र में बाघ का खतरा सबसे अधिक रहता है। जमीन से रखवाली करने में हिंसक वन्यजीवों के अचानक हमले का डर बना रहता है। इसलिए खेत की मेढ़ पर चार मजबूत बल्लियाँ गाड़कर उसके ऊपर लकड़ी का ढांचा तैयार किया जाता है और धूप-बारिश से बचने के लिए उस पर छप्पर डाल दिया जाता है। इस ऊँचाई से पूरे खेत पर आसानी से नज़र रखी जा सकती है और बाघ या अन्य हिंसक जानवर ऊपर हमला नहीं कर पाते।”

⚡ झटका फेंसिंग से रुक रही घुसपैठ: हल्के करंट के झटके से डरकर भाग रहे वन्यजीव

एक अन्य किसान नाथूराम ऊइके ने बताया कि ऊंचे ढाबे पर बैठकर पहरेदारी करने के साथ-साथ अब कई किसान ‘झटका फेंसिंग’ तकनीक का भी उपयोग कर रहे हैं।

इसके तहत खेत के चारों ओर लकड़ी के खूंटे गाड़कर उनमें पतला तार दौड़ाया जाता है और एक मशीन (सोलर झटका चार्जर) के जरिए उसमें बहुत हल्का करंट प्रवाहित किया जाता है। जब भी कोई जंगली जानवर खेत में घुसने का प्रयास करता है, तो इन तारों के संपर्क में आते ही उसे हल्का सा झटका लगता है। इससे जानवर बिना किसी गंभीर नुकसान के डरकर वापस जंगल की ओर भाग जाते हैं।

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