धार्मिक नगरी उज्जैन में सावन-भादवा मास के पावन अवसर पर प्रजा के हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलने वाले भगवान श्री महाकालेश्वर की दूसरी सवारी पूरी भव्यता और पारंपरिक उत्साह के साथ निकाली गई। इस दौरान महाकाल मंदिर से लेकर क्षिप्रा तट तक भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। राजाधिराज महाकाल की एक झलक पाने के लिए दूर-दराज से आए भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा शहर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
🎺 राजकीय सम्मान के साथ पालकी में सवार होकर निकले बाबा महाकाल
परंपरा के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद पुलिस प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारियों द्वारा भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर (राजकीय सम्मान) दिया गया। इसके पश्चात बाबा महाकाल पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। सवारी मार्ग पर दोनों तरफ खड़े हजारों श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर महाकाल का स्वागत किया।
🌊 क्षिप्रा तट पर हुआ अभिषेक और आरती
भगवान महाकाल की यह सवारी महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी मार्ग से होती हुई पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर पहुँची। तट पर पहुँचने के बाद माँ क्षिप्रा के जल से भगवान महाकाल का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान घाट पर मौजूद साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने मिलकर महाकाल की आरती उतारी। पूजा-पाठ संपन्न होने के बाद सवारी पुनः पारंपरिक मार्गों से होते हुए वापस मंदिर पहुँची।

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