दिल्ली की जहरीली आबोहवा में कुछ सुधार के लिए ऑड-इवन लागू करने की बात पर एनजीटी की शर्तों ने पानी फेर दिया। एनजीटी ने जो शर्तें लगाईं, उनका पालन करने में केजरीवाल सरकार ने असमर्थता जताई है। सरकार के अनुसार उसके पास इतने संसाधन नहीं हैं, जिससे एनजीटी की इन 8 शर्तों पर अमल किया जा सके। इसके चलते ऑड-इवन के फैसले से ऐन वक्त पर सरकार को पीछे हटना पड़ा।
ऑड-इवन लागू करने पर कहा गया कि इसमें महिलाओं को कोई छूट नहीं दी जाए। इससे पहले तक ऑड-इवन में महिलाओं को इस दायरे से बाहर रखा जाता था। नियम लागू होगा तो सब पर, वो महिला हो या पुरुष। एनजीटी ने दोपहिया वाहनों पर भी ऑड-इवन लागू करने को कहा। इस पर दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने तर्क दिया कि दिल्ली में 66 लाख टू-व्हीलर हैं, ऐसे में अगर 50 फीसदी बाइक सड़क से हटती हैं तो 3500 बस लानी पड़ेंगी, जो संभव नहीं है। वीवीआईपी वाहनों पर भी ऑड-इवन लागू किया जाए। सीएनजी वाहनों, एंबुलेंस और दमकल जैसी आपातकालीन सेवाओं को ही ऑड-इवन से छूट दी जाए। इस तरह की शर्तों पर केजरीवाल सरकार को बैकफूट पर आना पड़ा।
ऑड-इवन पर केजरीवाल का फैसला एनजीटी की शर्तों पर अटका

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