August 14, 2026

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Totladoh Reservoir Controversy: सैकड़ों करोड़ के अवैध मछली कारोबार पर घिरी सरकार, एनटीसीए ने एमपी से मांगी रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित तोतलादोह जलाशय में कथित रूप से चल रहे अवैध मछली शिकार और संगठित कारोबार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर मामले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुँचने के बाद राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार से इस पर विस्तृत ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) तलब की है। एनटीसीए ने प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन को पत्र लिखकर शिकायत की गहराई से जांच करने और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ ठोस व त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

💥 डायनामाइट और विस्फोटकों के इस्तेमाल का आरोप, वनकर्मियों पर हमलों का दावा

शिकायतकर्ता और छिंदवाड़ा निवासी कैप्टन ब्रजेश भारद्वाज की ओर से पीएमओ को भेजी गई शिकायत में सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं कि जलाशय के कोर क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद बड़े पैमाने पर मछलियों का अवैध शिकार किया जा रहा है। आरोप है कि मछली पकड़ने के लिए पानी के भीतर डायनामाइट जैसे खतरनाक विस्फोटकों का इस्तेमाल होता है। इतना ही नहीं, अवैध शिकार को रोकने के लिए जब वन विभाग का गश्ती दल या विशेष बाघ सुरक्षा बल मौके पर पहुंचता है, तो उन पर फायर बम और बंदूकों से जानलेवा हमले किए जाते हैं। शिकायत में हाल ही में वनकर्मियों की नावों को आग के हवाले किए जाने जैसी गंभीर घटना का भी विशेष उल्लेख किया गया है।

💰 सैकड़ों करोड़ का सिंडिकेट और जलीय जैव-विविधता पर मंडराता बड़ा खतरा

शिकायत के अनुसार, तोतलादोह में यह अवैध मछली कारोबार अब एक बड़े और संगठित सिंडिकेट का रूप ले चुका है, जिसका वार्षिक कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। बफर क्षेत्र के आसपास के गांवों से लोग रात के समय कोर क्षेत्र में घुसकर बड़े पैमाने पर मछली निकालते हैं और उन्हें छिंदवाड़ा व सिवनी के रास्ते पिकअप तथा बोलेरो जैसे वाहनों से महाराष्ट्र के नागपुर, सावनेर और खापा बाजारों में खपाते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की अंधाधुंध मानवीय गतिविधियों और विस्फोटकों के इस्तेमाल से पेंच के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, मगरमच्छों, कछुओं और बाघों के प्राकृतिक आवास पर गंभीर संकट आ सकता है। अब सभी की निगाहें एनटीसीए को सौंपी जाने वाली मध्य प्रदेश वन विभाग की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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