November 4, 2026

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Shubh Muhurat Annakut Bhog: अन्नकूट महोत्सव पर लगाएं छप्पन भोग, जानिए गोवर्धन पूजा से जुड़ी सभी जरूरी बातें

हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दीपावली के ठीक अगले दिन गोवर्धन पूजा करने की सनातन परंपरा है। हालांकि, तिथि के समय और उदया तिथि के नियमों के कारण कभी-कभी दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर भी आ जाता है। वर्ष 2026 में गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के मन में संशय रहता है कि यह पर्व 9 नवंबर को मनाया जाएगा या 10 नवंबर को, तो पंचांग के अनुसार इसकी पूरी स्थिति स्पष्ट है।

📅 गोवर्धन पूजा 2026 तिथि और सुबह का शुभ मुहूर्त; जानिए पूजा का सही समय

पंचांग और मुहूर्त की जानकारी:

  • प्रतिपदा तिथि का समय: पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी।
  • उदया तिथि और तारीख: सनातन धर्म में उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026 (मंगलवार) के दिन की जाएगी।
  • सुबह का शुभ मुहूर्त: गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि लगभग 2 घंटे 12 मिनट की है।
📜 क्यों मनाई जाती है गोवर्धन पूजा? जानिए भगवान श्रीकृष्ण और इंद्र देव से जुड़ी पौराणिक कथा

कथा और मान्यता:

  • प्रकृति और पर्वत की पूजा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया था। भगवान कृष्ण ने बताया था कि गोवर्धन पर्वत ही ब्रज के लोगों और उनके पशुओं को भोजन, चारा और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करता है।
  • इंद्र का अहंकार और गोवर्धन धारण: इस बात से देवराज इंद्र अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। लगातार हो रही बारिश से लोगों की रक्षा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था, जिसके नीचे ब्रजवासी और उनके पशु पूरी तरह सुरक्षित रहे। अंततः सात दिनों तक बारिश करने के बाद इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी। इसी घटना की स्मृति में गोवर्धन पूजा की जाती है।
🍲 गोवर्धन पूजा को क्यों कहा जाता है ‘अन्नकूट’? जानिए छप्पन भोग की परंपरा

अन्नकूट का धार्मिक महत्व:

  • अनाज और पकवानों का समूह: गोवर्धन पूजा को ‘अन्नकूट पर्व’ के रूप में भी धूमधाम से मनाया जाता है। अन्नकूट का शाब्दिक अर्थ है तरह-तरह के अनाज और पकवानों का विशाल समूह।
  • भगवान को छप्पन भोग: इस पावन दिन भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवानों और व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। परंपरा के अनुसार, इस दिन गेहूं, चावल, दाल, बेसन से बनी कढ़ी और मौसमी सब्जियों से कई स्वादिष्ट पकवान तैयार किए जाते हैं। मंदिरों और घरों में अन्नकूट का आयोजन कर भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं, जिससे घर में कभी भी अन्न और धन का अभाव नहीं होता।
🙏 गोवर्धन पूजा के दिन कैसे करें पूजा? जानिए सरल विधि और नियम

पूजा की विधि और परंपराएं:

  • प्रातः स्नान और सजावट: गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मुख्य आंगन या पूजा स्थल पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की कलात्मक आकृति बनाएं। इसे फूलों, रोली, अक्षत और दीपकों से सजाएं।
  • परिक्रमा और गाय की सेवा: भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए गोवर्धन पर्वत की विधिवत पूजा करें और उन्हें अन्नकूट व मिठाइयों का भोग लगाएं। पूजा के दौरान गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने का भी विशेष विधान है। कई क्षेत्रों में इस दिन गौमाता (गायों) की पूजा करने की भी परंपरा है; गायों को तिलक लगाकर, फूलों से सजाकर गुड़ व हरा चारा खिलाया जाता है। परिवार के सभी लोग मिलकर भगवान से सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं।
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