November 4, 2026

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Tiger Reserve Gaur Relocation Success: बांधवगढ़ में फिर लौटी ‘गौर’ की गर्जना: 1998 में हो गए थे विलुप्त, अब 240 पहुंचा कुनबा

मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में कभी विशाल झुंडों के साथ विचरण करने वाले ‘गौर’ (भारतीय बिसन) समय के साथ पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। वर्ष 1998 तक बांधवगढ़ से गौर का अस्तित्व स्थानीय रूप से समाप्त हो चुका था। जिस जंगल की मुख्य पहचान कभी इन विशालकाय शाकाहारी वन्यजीवों से हुआ करती थी, वहां उनकी मौजूदगी केवल पुरानी यादों और किस्सों तक सीमित रह गई थी। लेकिन मध्य प्रदेश वन विभाग के सतत प्रयासों, वैज्ञानिक प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने इस कहानी को एक नया मोड़ दिया है। आज बांधवगढ़ के जंगलों में गौर की सफल वापसी देश के सबसे बड़े संरक्षण अभियानों में से एक बनकर सामने आई है।

🚜 2012 में हुई थी गौर पुनर्स्थापना की शुरुआत; कान्हा से लाए गए थे 50 गौर

पुनर्स्थापना और शुरुआती दौर:

  • कान्हा से स्थानांतरण: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर की पुनर्स्थापना का पहला चरण वर्ष 2011-12 में शुरू किया गया था, जब कान्हा टाइगर रिजर्व से लगभग 50 गौर को सुरक्षित बांधवगढ़ लाया गया था।
  • अनुकूल आवास और प्रजनन: शुरुआती दौर चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अनुकूल प्राकृतिक वातावरण और बेहतर वैज्ञानिक प्रबंधन के बल पर गौर धीरे-धीरे यहाँ के जंगलों में ढलने लगे। उन्होंने प्राकृतिक आवास को अपनाया और सफल प्रजनन शुरू किया। नन्हें शावकों के जन्म ने यह साबित कर दिया कि बांधवगढ़ में गौर की आबादी दोबारा मजबूत होने लगी है, और देखते ही देखते इनकी संख्या 170 तक पहुँच गई।
🔬 भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से बढ़ा दायरा; सतपुड़ा से लाए गए अतिरिक्त 50 गौर

अनुवांशिक विविधता और नया चरण:

  • सतपुड़ा से स्थानांतरण: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि गौर की आबादी को दीर्घकालिक रूप से स्थिर और मजबूत बनाने के लिए मध्य प्रदेश वन विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से इस अभियान को आगे बढ़ाया।
  • लक्ष्य हुआ पूरा: इसके तहत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 50 अतिरिक्त गौर बांधवगढ़ लाने की योजना बनाई गई। फरवरी 2025 में 23 और जनवरी 2026 में 27 गौर स्थानांतरित किए गए, जिससे निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गौर की आबादी में अनुवांशिक विविधता (Genetic Diversity) को बढ़ाना और उनके भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित करना था।
🌿 उमरिया वन मंडल तक फैला गौर का कुनबा; पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने में निभा रहे अहम भूमिका

वर्तमान स्थिति और वनकर्मियों का योगदान:

  • 240 तक पहुंची संख्या: क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि वर्तमान में बांधवगढ़ में गौर की अनुमानित संख्या 220 से 240 के बीच पहुंच गई है। इनका विस्तार अब उमरिया वन मंडल के आसपास के जंगलों तक भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
  • वनकर्मियों की निगरानी: इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे वनकर्मियों और कुशल वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारियों की दिन-रात की मॉनिटरिंग और देखरेख की अहम भूमिका रही है। गौर केवल विशाल शाकाहारी वन्यजीव नहीं हैं, बल्कि वे जंगलों के घास के मैदानों, वनस्पतियों और पोषक तत्वों के चक्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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