शहडोल जिले की बागडोर संभालते ही कलेक्टर पार्थ जायसवाल पूरी मुस्तैदी और सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने हाल ही में कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, मत्स्यपालन, कृषि अभियांत्रिकी और पशुपालन विभागों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की गहन समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की सभी कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र हितग्राहियों और किसानों को समय पर उनका पूरा लाभ मिल सके। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
🌊 बाणसागर डैम में बड़े पैमाने पर मछली पालन की तैयारी; नवंबर माह से दो कंपनियों ने शुरू किया 500-500 केज का कार्य
मत्स्य पालन और आय के नए साधन:
- प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग: शहडोल में नदियां और तालाब जैसे प्राकृतिक जल स्रोत मछली पालन की अपार संभावनाएं समेटे हुए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आदिवासी बहुल इलाके में मछली पालन के क्षेत्र में बड़ी क्रांति लाने की तैयारी की गई है।
- 10 हजार केज लगाने का लक्ष्य: मत्स्य पालन गतिविधियों के तहत शहडोल के प्रसिद्ध बाणसागर जलाशय में कुल 10 हजार केज लगाए जाने की योजना है। इसके तहत नवंबर माह में दो विभिन्न कंपनियों द्वारा 500-500 केज लगाने का कार्य धरातल पर शुरू कर दिया गया है।
- कलेक्टर के निर्देश: कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने निर्देश दिए हैं कि इस पूरी गतिविधि को एक सुनियोजित योजना के तहत आगे बढ़ाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों के लिए आय के नए रास्ते प्रशस्त हो सकें।
🌿 उद्यानिकी विभाग की मसाला विस्तार योजना; 3 जनपदों के 29 ग्रामों में होगी धनिया और मसालों की खेती
कृषि और उद्यानिकी का विविधीकरण:
- मसाला विस्तार योजना: उद्यानिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने मसाला विस्तार योजना के तहत किसानों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
- चिन्हांकित क्षेत्र: इस योजना के अंतर्गत जिले के तीन अलग-अलग जनपदों के 29 गांवों में किसानों द्वारा मसाला और मुख्य रूप से धनिया उत्पादन की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
🧪 रासायनिक खाद और बीजों की गुणवत्ता पर कड़ी नजर; निम्न गुणवत्ता मिलने पर होगी सीधी एफआईआर
खाद-बीज की उपलब्धता और कार्रवाई:
- लैब जांच के निर्देश: कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कृषि विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि रासायनिक उर्वरकों और बीजों के निरंतर नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जांच के लिए भेजा जाए। यदि जांच में कोई खाद या बीज निम्न गुणवत्ता (घटिया) का पाया जाता है, तो संबंधित संस्था या विक्रेता के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की कार्रवाई की जाए।
- पर्याप्त स्टॉक: बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में रासायनिक उर्वरक और बीज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। अब तक 2,511 मीट्रिक टन खाद का वितरण किया जा चुका है और 11,261 मीट्रिक टन खाद अभी उपलब्ध है। इसके अलावा, चना और मसूर का 15,943 क्विंटल बीज भी उपलब्ध है, जिसे किसान अधिकृत सहकारी समितियों के माध्यम से आसानी से खरीद सकते हैं।

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