मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से नवरात्रि पर्व को लेकर एक बेहद दिलचस्प और अनोखी परंपरा सामने आई है। आमतौर पर जहाँ पूरे देश में नौ दिनों तक शारदीय नवरात्रि मनाई जाती है, वहीं छिंदवाड़ा में एक ऐसा वर्ग भी है जो केवल 5 दिनों तक देवी की विशेष आराधना करता है। शहर के मोहन नगर में पिछले 40 सालों से यह अनूठा सिलसिला लगातार चला आ रहा है, जहाँ बंगाली समाज के लोग पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करते हैं।
🎨 पश्चिम बंगाल से 4 महीने पहले छिंदवाड़ा आते हैं मूर्तिकार: बंगाल की खास मिट्टी और साजो-सामान से तैयार होती हैं पांचों भव्य प्रतिमाएं
न्यू बंगाली सांस्कृतिक संस्था के सदस्य रंजीत मंडल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष बंगाली पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना की जाएगी और 21 अक्टूबर को विसर्जन होगा। यहाँ पिछले 40 वर्षों से एक ही पंडाल में एक साथ पांच मूर्तियां—मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक, गणेश और महिषासुर की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पश्चिम बंगाल से आए मूर्तिकार डीके पाल ने बताया कि वे मूर्ति निर्माण के लिए चार महीने पहले ही छिंदवाड़ा आ जाते हैं। मूर्तियां बनाने के लिए विशेष रूप से बंगाल से ही मिट्टी, कपड़े और अन्य सजावटी सामान मंगाया जाता है।
✨ संधि पूजा का होता है विशेष महत्व: सुबह के समय संपन्न होते हैं सभी धार्मिक अनुष्ठान और विधान
बंगाली समाज की इस विशेष पूजा-अर्चना का विधान बेहद खास होता है। इस बार लगभग सभी मुख्य पूजाएँ सुबह के समय ही संपन्न होंगी। इसके साथ ही अष्टमी और नवमी तिथि के संधि स्थल पर की जाने वाली विशेष ‘संधि पूजा’ का भी इस अनुष्ठान में खास महत्व माना जाता है। बंगाल से आकर यहाँ महीनों पहले से तैयारी करने वाले कलाकारों और स्थानीय समाज के सहयोग से छिंदवाड़ा में यह दुर्गा उत्सव शहरवासियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है।

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