मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में नमकीन क्लस्टर के लिए जिला प्रशासन द्वारा आवंटित की गई जमीन को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रतलाम शहर के पास स्थित करमदी गांव में नमकीन क्लस्टर के लिए तय की गई इस जमीन पर वर्षों से रह रहे गाडोलिया समाज के परिवारों और ग्रामीणों को प्रशासन की तरफ से बेदखली का नोटिस थमा दिया गया है। इस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और मुख्य गेट पर धरना देकर जमीन आवंटन निरस्त करने की मांग की।
📜 40-45 सालों से करमदी गांव में रह रहे हैं लोग: बिना मुआवजा और विस्थापन के उजाड़े जाने का लगाया गंभीर आरोप
कलेक्ट्रेट पहुंचे गाडोलिया समाज के लोगों ने अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। प्रभावितों में शामिल शंकर गाडोलिया ने बताया कि उनके समाज के 30 से अधिक परिवार पिछले 40-50 वर्षों से यहीं निवास कर रहे हैं और वे करमदी ग्राम पंचायत के पंजीकृत मतदाता भी हैं। इन लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर वहां पक्के मकान तक बना लिए हैं। वहीं, सरपंच प्रतिनिधि राजेश पुरोहित ने आरोप लगाया कि प्रशासन बिना किसी पुनर्वास या विस्थापन की व्यवस्था किए इन गरीब परिवारों को बेघर करने पर तुला हुआ है, जबकि इनमें से कई लोगों को पीएम आवास योजना का लाभ भी मिल चुका है।
⚖️ तहसीलदार का बयान—उद्योग विभाग की है जमीन: नोटिस जारी कर शुरू की गई है हटाने की कार्रवाई
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रतलाम के तहसीलदार कुलभूषण शर्मा ने स्पष्ट किया कि करमदी गांव के ग्रामीण जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि नमकीन क्लस्टर के लिए जिस जमीन को आवंटित किया गया है, वह पूरी तरह से उद्योग विभाग के आधिपत्य की है और विभाग के सक्षम अधिकारियों द्वारा ही नियमानुसार बेदखली के नोटिस जारी किए गए हैं। फिलहाल, उद्योग विभाग द्वारा जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन गाडोलिया समाज के कड़े विरोध के चलते यह मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

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