मध्य प्रदेश के रीवा जिले स्थित प्रतिष्ठित गांधी मेमोरियल अस्पताल (GM Hospital) में बहुचर्चित कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की हुई tragic मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग और शासन की कार्रवाई पूरी तरह से महज एक दिखावा साबित हुई है। इस पूरे प्रकरण के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शासन ने जिस आरोपी डॉक्टर गुंजन गोस्वामी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था, उसे महज 20 दिन के भीतर ही चुपचाप दोबारा बहाल कर दिया गया है। इस फैसले के सामने आने के बाद एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
📱 वीडियो वायरल होने के बाद गरमाई थी सियासत; कांग्रेस के आक्रामक रुख के बाद बैकफुट पर आई थी सरकार
घटना की पृष्ठभूमि और राजनीतिक सरगर्मी:
- सुर्खियों में आया मामला: प्रसूता और उसके नवजात की मौत के बाद अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था, जिसके बाद यह संवेदनशील मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में छा गया था।
- कांग्रेस का आक्रामक तेवर: विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया, जिससे शासन पूरी तरह बैकफुट पर आ गया था।
⚡ जनता का गुस्सा शांत करने के लिए किया गया था आनन-फानन में सस्पेंशन; डीन और अधीक्षक को भी हटाया गया था
प्रशासनिक कार्रवाई और लीपापोती:
- दिखावे की बड़ी कार्रवाई: जनता के सुलगते गुस्से और विरोध प्रदर्शन को शांत करने के लिए शासन ने आनन-फानन में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही, मेडिकल कॉलेज के डीन और अस्पताल अधीक्षक को भी उनके पदों से हटा दिया गया था।
- मजिस्ट्रियल जांच के आदेश: मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए थे, जिससे आम जनता को यह उम्मीद बंधी थी कि इस बार दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन महज कुछ ही हफ्तों में आदेश वापस होने से सारी उम्मीदें ध धरी रह गईं।

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