उज्जैन: विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की कृषि विज्ञान अध्यनशाला में आज गुरुवार को एग्रीकल्चर साइंस विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
सेमिनार में तीन व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रथम व्याख्यान में महाकाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के डायरेक्टर डॉ. ऋषि दुबे ने एग्रीकल्चर मार्केटिंग विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर को एक व्यवसाय के रूप में विकसित जा सकता है। वर्तमान में इस क्षेत्र में प्रोफेशनलिज्म के साथ विद्यार्थियों को कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने एग्रीकल्चर की अपार संभावनाओं को बताते हुए इस क्षेत्र में कोऑपरेटिव सिस्टम की संभावनाओं को बताया।
दूसरा व्याख्यान असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ़ एग्रीकल्चर सॉइल टेस्टिंग लैब उज्जैन के डॉ. सी. पी. पाटीदार द्वारा भारत में समस्या ग्रस्त मृदा पर दिया। उन्होंने विस्तारपूर्वक विद्यार्थियों को बताया कि इस प्रकार की समस्या ग्रस्त मृदा से फसलों के उत्पादन उनकी उर्वरता में कमी के साथ-साथ पोषक तत्वों में हेवी मेटल्स की टाक्सीसिटी के कारण दिन प्रतिदिन मृदा स्वास्थ्य को नुकसान हो रहा है तथा बहुत अधिक मात्रा में उर्वरकों का उपयोग होने से मृदा का पीएच और उसकी विद्युत चालकता खराब हो रही है। उन्होंने विभिन्न विभिन्न प्रकार की समस्या ग्रस्त मृदाओं के बारे में बताते हुए उनमें सुधार के लिए फसलों का चयन कर भिन्न भिन्न प्रकार की साल्ट टोलरेंट वैरायटी का उपयोग कर मृदा सुधार के लिए चूना और जिप्सम के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने मृदा के पीएच एवं मृदा की भौतिक दशा को कैसे सुधारा जा सकता है। सभी तथ्यों पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विस्तार पूर्वक व्याख्यान दिया।
एक अन्य व्याख्यान ओरिएंटल विश्वविद्यालय से एंटोंमोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर हेमंत कुमार वर्मा ने मधुमक्खी पालन विषय पर अपना दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि सभी तरह के कीट इंसेक्ट कृषि के लिए हानिकारक नहीं होते हैं। कुछ इंसेक्ट हमारे दोस्त भी होते हैं। उन्हें पहचानें और उनका पालन कर हम स्वरोजगार तथा अपनी उपज को बढ़ावा दे सकते हैं।
विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडेय ने विभाग को सेमिनार के आयोजन की बधाई दी और इस प्रकार के कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की बात कही। इस एकदिवसीय सेमिनार की अध्यक्षता सांख्यिकी एवं कृषि विज्ञान अध्ययनशाला के विभाग अध्यक्ष डॉ राजेश टेलर ने की।
कार्यशाला का संचालन डॉ. पुष्पेंद्र सिंह घोष ने किया तथा आभार डॉ. शोभा मालवीय ने माना। इस अवसर पर सांख्यिकी एवं कृषि विज्ञान अध्ययनशाला के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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