जबलपुर। भोपाल में अभिनेत्री व मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को गिरीबाला सिंह की जमानत याचिका पर लंबी सुनवाई हुई। जस्टिस एके निरंकारी की अदालत में बचाव पक्ष, पीड़ित पक्ष के साथ-साथ सीबीआई का पक्ष भी विस्तार से सुना गया। करीब 7 घंटे तक चली मैराथन सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने गिरीबाला सिंह की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनकी सास गिरीबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
🔍 सीबीआई की चार्जशीट और वॉयस सैंपल पर कोर्ट में बहस: मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के बीच बचाव पक्ष ने दी उम्र व सहयोग का हवाला
अदालत में पेश सीबीआई की चार्जशीट को लेकर भी लंबी कानूनी बहस हुई। जांच एजेंसी की चार्जशीट में ट्विशा को कथित तौर पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं, हालांकि बचाव पक्ष के अनुसार इसमें दहेज प्रताड़ना का जिक्र नहीं है। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने दलील दी कि गिरीबाला की उम्र अधिक है और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है, जबकि ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने जमानत का कड़ा विरोध किया। अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा कि गिरीबाला सिंह को राहत मिलती है या नहीं।

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