September 14, 2026

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MP Balaghat News Update: बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भड़के पूर्व सांसद

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के अत्यंत दुर्गम आदिवासी बैगा बहुल गांवों में रहस्यमयी बीमारी से कई मासूम बच्चों की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पीड़ित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे।

इसके बाद रविवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट की, जिसमें खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए लिखा—’मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं।’ उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए आगे लिखा कि उन्हें प्रदेश की जनता की सेवा का अवसर मिला, लेकिन वह इसमें स्पष्ट रूप से विफल रहे। यह पत्र बालाघाट में हुई मौतों पर मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ उनका एक तीखा राजनीतिक कटाक्ष है।

🎥 दौरे के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से विवाद: पीड़ित महिला के सामने माफी मांगने का वीडियो हुआ वायरल

उधर, अभिजीत दीपके के बालाघाट दौरे के दौरान बाहर से आए कुछ कथित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा सवाल पूछने का तरीका अब नए विवाद और विरोध की वजह बन गया है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में एक स्थानीय महिला अभिजीत से सवाल पूछती नजर आ रही है, जिसके जवाब में वे हाथ जोड़कर माफी मांगते दिख रहे हैं। इन्फ्लुएंसर्स द्वारा संवेदनशील मुद्दे पर की जा रही कवरेज और उनके व्यवहार को लेकर स्थानीय लोगों तथा दीपके के बीच तीखी बहस और विवाद की स्थिति निर्मित हो गई।

📢 ‘प्रायोजित हैं बाहर से आए इन्फ्लुएंसर्स’: पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने प्रेस वार्ता कर घटना को बताया निंदनीय

पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने रविवार को बालाघाट के सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित कर इस पूरी घटना को बेहद निंदनीय करार दिया।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बालाघाट में डेरा डाले हुए ये बाहर के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पूरी तरह से प्रायोजित हैं और मूल मुद्दे तथा मासूम बच्चों की मौत के गंभीर संकट से जनता का ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

🏛️ मानवाधिकार आयोग पहुंचा बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला: स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच की उठी मांग

बैगा आदिवासी बच्चों की असामयिक और दर्दनाक मौतों का यह गंभीर मामला अब मानवाधिकार आयोग के दरवाजे तक पहुंच गया है।

दिल्ली के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत ने इस संबंध में मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग (MPHRC) में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आयोग से मांग की है कि बैगा बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत के वास्तविक और सटीक कारणों की पता लगाने के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय चिकित्सकीय टीम से जांच कराई जाए ताकि अन्य बच्चों की जान बचाई जा सके।

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