भोपाल। भोपाल के महात्मा गांधी सांदीपनि स्कूल की जिस टूटी टाइल्स को बेकार समझकर कबाड़ में फेंक दिया गया था, वही अब बच्चों के लिए किताबों से आगे बढ़कर प्रैक्टिकल पढ़ाई का बेहतरीन जरिया बन चुकी है।
कहीं इन्हीं टूटी टाइल्स पर क्ले और रंगों की मदद से मानव शरीर के अंगों के जटिल डायग्राम तैयार किए गए हैं, तो कहीं टूटे बेंच और पुराने टायरों का उपयोग कर ऐसा गणितीय मॉडल बनाया गया है, जिसमें खेलते-खेलते बच्चे कठिन सवाल हल कर रहे हैं। राजधानी के इस सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों का यह अनोखा प्रयोग साबित करता है कि पढ़ाई को रोचक व आसान बनाने के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि नवाचार और सोच की जरूरत होती है।
🧬 टूटी टाइल्स पर क्ले से उकेरा मानव शरीर का उत्सर्जी तंत्र: रटने के बजाय समझ रहे बच्चे
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्कूल की साइंस शिक्षिका अर्चना शुक्ला बताती हैं कि “कक्षा 10 के बच्चों को ‘लाइफ प्रोसेस’ (जैव प्रक्रम) चैप्टर पढ़ाते समय यह विचार आया कि हर बार डायग्राम केवल कागज पर ही क्यों बनाए जाएं। इसके बाद स्कूल परिसर में पड़ी टूटी टाइल्स का उपयोग करने का निर्णय लिया गया।”
छात्रों ने क्ले, स्केच पेन और टेप की मदद से इन टाइल्स पर मानव उत्सर्जी तंत्र और विभिन्न जैविक संरचनाओं के जीवंत मॉडल बनाए। कक्षा 10 के छात्र सुमित विश्वकर्मा और रुद्रांश बताते हैं कि 3D मॉडल खुद बनाने से अंगों की सही स्थिति और आकार को याद रखना अब बहुत आसान हो गया है।
📐 टूटे बेंच और पुराने टायरों से तैयार हुआ मैथ्स का खेल: खेल-खेल में हल हो रहे गणित के सवाल
यह अभिनव प्रयोग केवल विज्ञान विषय तक सीमित नहीं है। ‘प्रोजेक्ट एंड प्रॉब्लम बेस्ड लर्निंग’ के तहत छात्रों ने पाया कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को गणित समझने में कठिनाई होती है। इसका समाधान भी विद्यार्थियों ने स्वयं निकाला।
स्कूल में रखे टूटे लोहे के बेंचों की वेल्डिंग कराकर और अनुपयोगी पुराने टायरों को जोड़कर एक इंटरैक्टिव मैथ्स मॉडल तैयार किया गया। इसमें 2×6 जैसे सवाल लिखकर उत्तर के लिए खाली जगह छोड़ी जाती है। बच्चे खेल-खेल में नए-नए सवाल बनाते और हल करते हैं, जिससे उनका गणित का डर हमेशा के लिए दूर हो रहा है।
🧲 750 कीलों वाले मॉडल से समझ रहे भौतिकी के नियम: रोजाना की जिंदगी से जुड़ी साइंस
स्कूल की साइंस लैब में तैयार किए गए मॉडल बच्चों को व्यावहारिक जीवन में छिपे विज्ञान से जोड़ते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 750 कीलों वाला फिजिक्स मॉडल है।
एक बोर्ड पर एकल कील और दूसरे पर सैकड़ों कीलें लगाई गई हैं, जिसके माध्यम से बच्चों को क्षेत्रफल (Area) और दाब (Pressure) के बीच का वैज्ञानिक संबंध आसानी से समझाया जाता है। शिक्षक इसे दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़ते हैं, जिससे विद्यार्थियों के लिए भौतिकी केवल परीक्षा पास करने का विषय न रहकर आसपास की दुनिया को समझने का माध्यम बन गया है।

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