इंदौर। सोमवार से देशभर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ शुरू हो चुका है। लोग बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ बप्पा को अपने घर ला रहे हैं और भव्य पंडालों में स्थापित कर रहे हैं।
विभिन्न धार्मिक मान्यताओं वाले हमारे देश में भगवान गणेश की मूर्तियों का चयन उनकी ‘सूंड की दिशा’ के हिसाब से किया जाता है, जिसका विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। यही वजह है कि हर साल गणेशोत्सव पर भक्त मूर्ति स्थापना से पहले सूंड की दिशा और उसके प्रभाव का खास ध्यान रखते हैं।
☯️ सूंड के हिसाब से गणेश प्रतिमा का चयन: जानिए वास्तु और शास्त्रों का विधान
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में भगवान गणेश की दाईं और बाईं तरफ मुड़ी हुई सूंड को लेकर बहुत गहरी मान्यताएं हैं।
यही कारण है कि हर साल लाखों की संख्या में तैयार होने वाली गणेश प्रतिमाओं में मूर्तिकार से लेकर खरीदार और भक्तगण सूंड की दिशा का विशेष ध्यान रखते हैं। हालांकि, जो सामान्य भक्त या उपासक सूंड के धार्मिक महत्व और नियमों से अनजान होते हैं, वे अक्सर कोई भी प्रतिमा चुन लेते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, सही दिशा वाली सूंड की प्रतिमा का चयन ही परिवार के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है।
🔮 दिशा के हिसाब से गणेश जी का स्वभाव: खजराना मंदिर के पुजारी ने बताए नियम
इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के पुजारी उमेश भट्ट बताते हैं, “हिंदू मान्यताओं में दाईं तरफ की सूंड वाले गणेश जी अति उग्र स्वभाव के माने जाते हैं। इनकी पूजा-अर्चना में विशेष सावधानी और कड़े नियमों का पालन करना होता है, क्योंकि पूजा में हुई चूक का दोष लगता है।”
इसके विपरीत, बाईं तरफ की सूंड वाले गणेश जी अत्यंत मंगलकारी और शांत स्वभाव के होते हैं। भक्तों द्वारा अनजाने में हुई गलतियों को वे सहजता से क्षमा कर देते हैं। इसीलिए गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग बाईं सूंड वाली प्रतिमा को ही प्राथमिकता देते हैं। इंदौर के विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में स्थापित विशाल प्रतिमा भी बाईं तरफ की सूंड वाली ही है, जिन्हें अत्यंत शुभ और सिद्ध फलदायी माना जाता है।
🌙 बायीं तरफ की सूंड वाले गणेश जी (वाममुखी): घर में लाते हैं सुख, शांति और समृद्धि
बाईं तरफ मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी को ‘वाममुखी गणेश’ कहा जाता है। इन्हें चंद्र ऊर्जा और शीतलता का प्रतीक माना गया है।
मान्यता है कि घर में वाममुखी गणेश प्रतिमा स्थापित करने से परिवार में सुख, शांति, आपसी प्रेम और समृद्धि का वास होता है। गृहस्थ आश्रम के लिए इस प्रकार की प्रतिमा को सबसे उत्तम और कल्याणकारी माना गया है, क्योंकि इनकी दैनिक पूजा-अर्चना के नियम बेहद सरल और सामान्य होते हैं।
☀️ दायीं तरफ की सूंड वाले गणेश जी (सिद्धिविनायक): कठोर अनुष्ठान और उग्र ऊर्जा के प्रतीक
दाईं तरफ मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी सूर्य की ऊर्जा, उग्रता और तेज के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें ‘सिद्धिविनायक’ रूप में पूजा जाता है।
माना जाता है कि इस रूप में गणेश जी अत्यंत जागृत अवस्था में होते हैं। इसलिए इनकी स्थापना के बाद नियमित पूजा, भोग और अनुष्ठान के नियम बेहद कठोर और त्रुटिहीन होने चाहिए। आमतौर पर दाईं सूंड वाली प्रतिमाओं की स्थापना मंदिरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों में या किसी विशेष तंत्र-मंत्र सिद्धि को प्राप्त करने के लिए की जाती है।
🧘 सामने की ओर (सीधी) सूंड वाले गणेश जी: दुर्लभ और उच्च आध्यात्मिक साधना का प्रतीक
सीधी सूंड वाले भगवान गणेश की प्रतिमाएं बेहद दुर्लभ होती हैं। इन्हें संयम, संतुलन और उच्च आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि सीधी सूंड वाली गणेश प्रतिमा की स्थापना और ध्यान करने से साधक को मन में पूर्ण एकाग्रता, मानसिक संतुलन और असीम शांति प्राप्त होती है। इस तरह की प्रतिमाएं मुख्य रूप से ध्यान केंद्रों और योग साधना स्थलों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

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