मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में परंपरा के नाम पर हर साल खेला जाने वाला खूनी खेल ‘गोटमार मेला’ आज आयोजित किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक और खतरनाक आयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जाम नदी के दोनों तरफ पांढुर्णा और सावरगांव में प्रशासन की निगरानी में पत्थरों के ढेर लगवाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल दोनों गांवों के लोग एक-दूसरे पर हमला करने के लिए करेंगे। इस पारंपरिक खूनी संघर्ष में हर साल सैकड़ों लोग घायल होते हैं, जिसे देखते हुए इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
🚑 22 एंबुलेंस और 700 पुलिसकर्मी तैनात, गोफन और धारदार हथियारों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध
पांढुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने बताया कि गोटमार मेले के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 700 से अधिक पुलिसकर्मियों को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया है, साथ ही घायलों के तुरंत इलाज के लिए 22 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेले में गोफन और किसी भी प्रकार के धारदार हथियारों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। जाम नदी के बीचों-बीच पलाश के पेड़ का विशेष झंडा लगाया जाता है, जिसे हासिल करने के लिए दोनों गांवों के लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

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