धार। मध्य प्रदेश के धार जिले की कुक्षी विधानसभा क्षेत्र स्थित ग्राम टाणा से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करने वाला एक शर्मनाक मामला सामने आया है। गांव के शासकीय प्राथमिक स्कूल का भवन पूरी तरह जर्जर हो जाने के कारण उसे गिराने (डिस्मेंटल करने) के आदेश दो साल पहले ही जारी हो चुके हैं।
भवन न होने के कारण प्राइमरी स्कूल के छोटे-छोटे मासूम बच्चे दर-दर भटकने को मजबूर हैं। शिक्षकों ने सुरक्षा के लिहाज से पहले बच्चों की कक्षाएं स्थानीय मंदिर में लगानी शुरू कीं, लेकिन जब वहां मौसम और अन्य समस्याएं आईं, तो स्कूल को परिसर में खाली पड़े नए शौचालय में ही सजा दिया गया। मामला मीडिया में गरमाने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की है।
🛕 जर्जर भवन की छत गिरने का डर: कभी मंदिर तो कभी शौचालय में शिफ्ट किए गए 22 मासूम बच्चे
ग्राम टाणा स्थित इस शासकीय प्राथमिक स्कूल के नाम पर मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्तमान में कक्षा 1 से 5वीं तक के दर्ज 22 बच्चों की पढ़ाई शौचालय के भवन में कराई जा रही है।
स्कूल का पुराना ढांचा बेहद जर्जर हो चुका है और उसकी छत का हिस्सा किसी भी वक्त गिरकर बड़े हादसे का कारण बन सकता है। किसी दुर्घटना के डर से शिक्षकों ने बच्चों को सुरक्षित स्थान देने के नाम पर कभी गांव के भिलट देव मंदिर में बिठाया, तो कभी परिसर में बनकर तैयार हुए नए शौचालय भवन में ही उन्हें शिफ्ट कर दिया।
📋 मामला गरमाने पर पहुंचे बीईओ और बीआरसी, पंचनामा बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) हीरालाल निगवाल और बीआरसी (BRC) विजय कुमार शुक्ला ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्कूल का निरीक्षण किया और पंचनामा तैयार कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को प्रेषित की।
गांव के ग्रामीण राधेश्याम मुजाल्दा और लोकेश मुजाल्दा ने बताया, “हमारे गांव में स्कूल के लिए उपयुक्त भवन ही नहीं है और बच्चों को बैठाने की कोई समुचित जगह नहीं बची है। करीब 6 महीने पहले एक नया शौचालय बनाया गया था। चूंकि उसका उपयोग शौचालय के रूप में नहीं हो रहा था, इसलिए मजबूरी में बच्चों को वहीं बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।” वहीं बीईओ हीरालाल निगवाल ने स्वीकार किया कि स्कूल भवन को ध्वस्त करने के आदेश दो वर्ष पूर्व ही हो चुके थे।
☀️ ‘धूप तेज थी इसलिए शौचालय में बैठाया’: शिक्षा अधिकारियों ने दी सफाई, फोटो खींचने का भी लगाया आरोप
बच्चों को शौचालय में बैठाए जाने के सवाल पर शिक्षा अधिकारियों ने अजीबोगरीब दलील दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना वाले दिन धूप काफी तेज थी और मंदिर परिसर में सीधी धूप आ रही थी, इसी वजह से 7-8 बच्चों को कुछ समय के लिए छाया में शौचालय वाले कमरे में बैठाया गया था। हालांकि उन्होंने माना कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था।
वहीं बीआरसी विजय कुमार शुक्ला ने एक नया दावा करते हुए कहा, “जब हमने बच्चों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि गांव में एक जीप आई थी, जिसमें सवार दो अज्ञात लोगों ने बच्चों को शौचालय के अंदर बैठाया, दरवाजा खोला और फोटो खींचकर चले गए।” फिलहाल मामले की प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है।

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