September 23, 2026

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Indore Underground Metro Update: एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच 3.5 KM लंबी सुरंग; 24 घंटे टीबीएम से होगा काम

इंदौर। इंदौरवासियों के लिए अंडरग्राउंड मेट्रो का सपना अब धरातल पर उतरने जा रहा है। मंगलवार से शहर में मेट्रो टनल (सुरंग) की खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह शहर के इतिहास में पहला मौका होगा जब एयरपोर्ट के ठीक सामने टनल बोरिंग मशीन (TBM) जमीन के भीतर खुदाई का काम शुरू करेगी।

⚙️ शुरुआती दौर में धीमी रहेगी टनल बोरिंग की रफ्तार: मिक्स्ड फेस शील्ड TBM का किया जा रहा इस्तेमाल

जमीन के अंदर मौजूद मिट्टी और चट्टानों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए, शुरुआत में टीबीएम को ‘सॉफ्ट लॉन्चिंग’ के तहत बेहद नियंत्रित और धीमी गति से चलाया जाएगा।

भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने वाली ‘मिक्स्ड फेस शील्ड’ TBM का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सुरंग जमीन की सतह से लगभग 9 से 28 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। सुरंग को स्थायी मजबूती देने के लिए इसके भीतर प्रीकास्ट आरसीसी (RCC) रिंग्स लगाई जाएंगी।

🏢 आसपास की इमारतों और जमीन की 24 घंटे होगी निगरानी: लगाए गए आधुनिक रियल-टाइम सेंसर

चूंकि एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक का यह अंडरग्राउंड रूट घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मशीन और पूरे निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। जैसे-जैसे टीबीएम आगे बढ़ेगी, ये सेंसर जमीन और आसपास के भवनों में होने वाले किसी भी मामूली बदलाव को रियल-टाइम में दर्ज करेंगे। यदि कोई भी अप्रत्याशित बदलाव नजर आता है, तो इंजीनियरिंग टीम तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

🔄 ‘थ्री-टियर सिस्टम’ पर काम करेगी TBM: खुदाई के साथ-साथ डलेगी प्रीकास्ट आरसीसी रिंग

सामान्य बोरिंग मशीन वर्टिकल (सीधी) खुदाई करती है, लेकिन टीबीएम जमीन के समानांतर (Horizontal) खुदाई करती है। यह मशीन ‘थ्री-टियर सिस्टम’ पर काम करती है, जिसमें तीन काम एक साथ होते हैं— पहला ड्रिलिंग, दूसरा प्रीकास्ट सेगमेंटल रिंग (केसिंग पाइप की तरह) लगाना और तीसरा मलबा बाहर निकालना।

  • काम की गति: टनलिंग के काम को बिना रोके 24 घंटे चलाने के लिए तीन शिफ्टें तय की गई हैं। सुरक्षा के लिहाज से हर 1 मीटर की खुदाई के तुरंत बाद आरसीसी रिंग लगा दी जाएगी।
  • रूट और मशीन: टीबीएम ‘नर्मदा’ एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी, जिसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनेंगे। इस भारी-भरकम टीबीएम का कुल वजन लगभग 410 मीट्रिक टन है।
🚚 भोपाल की तर्ज पर मलबे का बेहतरीन इंतजाम: 4 लाख टन मलबे को हटाने के लिए कन्वेयर बेल्ट की व्यवस्था

जिस तरह राजधानी भोपाल में मेट्रो टनलिंग का काम रोजाना औसतन 1 से 2 मीटर की गति से चल रहा है, उसी तरह इंदौर में भी सुरक्षा के मद्देनजर शुरुआती रफ्तार 1 से 2 मीटर प्रतिदिन या इससे कम रखी जाएगी।

टनलिंग के दौरान निकलने वाले करीब 4 लाख टन मलबे को बाहर निकालने के लिए कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होगा, जहां से इसे डंपरों में भरकर निर्धारित स्थानों पर हटाया जाएगा। शहर में 17.5 किलोमीटर का एलिवेटेड (हवा में) कॉरिडोर पहले ही पूरा हो चुका है। अब अंडरग्राउंड काम के दौरान नागरिकों की सुविधा और सड़क यातायात पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए मशीन की रफ्तार को पूरी तरह नियंत्रित रखा जा रहा है।

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