मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सुबह से लेकर रात तक सड़कों पर नियम तोड़ने वालों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, जिससे सड़क सुरक्षा के आंकड़े बेहद चिंताजनक स्थिति बयां कर रहे हैं। चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 65 प्रतिशत से अधिक युवा (18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के) शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अगस्त तक 3.33 लाख से अधिक चालान किए जा चुके हैं, यानी हर दिन औसतन 1370 वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा रही है।
⏰ शाम 6 से 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे, ओवरस्पीडिंग और ब्लैक स्पॉट बने बड़ा खतरा
समयवार विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि शाम छह से नौ बजे के बीच सर्वाधिक 30 हादसे दर्ज हुए हैं, जबकि रात नौ से 12 बजे के बीच 25 दुर्घटनाएं हुईं। कार्यालयों और बाजारों से घर लौटने वाली भारी भीड़ और वाहनों का दबाव इस समय चरम पर होता है। इसके अलावा, तेज रफ्तार (ओवरस्पीड) 154 मामलों के साथ दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनी है। एडीसीपी संतोष कुमार कौल के अनुसार, अधिकांश दुर्घटनाएं एनएचएआई की सड़कों पर हो रही हैं, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में लोग डिवाइडर तोड़कर अवैध ‘शॉर्टकट’ बना लेते हैं, जिससे वाहन अचानक दिशा बदलते हैं और गंभीर हादसे होते हैं।
📈 पिछले साल के मुकाबले कार्रवाई में भारी इजाफा, प्रशासन ने दिए सुधार के निर्देश
यातायात विभाग की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 में पूरे साल के दौरान 1,79,920 चालान काटे गए थे, जबकि 2026 में केवल 31 अगस्त तक ही 3,33,831 चालान किए जा चुके हैं। यानी महज आठ महीने का आंकड़ा पिछले पूरे साल से 1.54 लाख अधिक है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों का है। प्रशासन ने नगर निगम, एनएचएआइ, एमपीआरडीसी, पीडब्ल्यूडी और आईडीए को निर्देश दिए हैं कि ब्लैक स्पॉट पर जल्द से जल्द रंबल स्ट्रिप, स्पीड ब्रेकर, रोड मार्किंग और कैमरे लगाने जैसे आवश्यक सुधार कार्य किए जाएं ताकि हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।

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