May 16, 2026

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चैत्र नवरात्रि महाष्टमी पर नगर पूजन हुआ,अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पूरी ने महाआरती कर लगाया माता को मदिरा का भोग

उज्जैन: चैत्र नवरात्री की महाष्टमी पर उज्जैन में आज नगर पूजन किया गया। परंपरा अनुसार माता मंदिर में की गई महाआरती में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष शामिल हुवे। उज्जैन के चोबीस खम्बा माता मंदिर में आज सुबह से ही भक्तो का ताँता लगा हुवा हें। यहाँ माता की पूजा राजा विक्रमादित्य करते थे इसी परंपरा का निर्वाह अश्विन नवरात्रि में जिलाधीश और चैत्र नवरात्रि में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष द्वारा किया जा रहा हें।

यहाँ अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी (निरंजनी अखाड़ा) ने माता को मदिरा का भोग लगाया तथा महा आरती की। माता की आरती के साथ शहर प्रदेश व देश में सुख शांति व खुशहाली की कामना की गई।

दरअसल उज्जैन में राजा विक्रमादित्य के समय से नगर पूजा की परम्परा चली आ रही है। इस परम्परा का निर्वाह उज्जैन के राजा अर्थात जिला कलेक्टर द्वारा किया जाता है। यहाँ चैत्र नवरात्रि में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और अश्विन शारदीय नवरात्रि में कलेक्टर पूजन करते है। इस पूजा में लगभग 19 किलो मीटर तक मदिरा की धार लगाई जाती है जो की शहर के कई देवी मंदिरों में जाती है । इस महापूजा में अखाड़ा परिषद के सदस्यों के साथ जिला प्रशासन के सदस्य व कई श्रद्धालु पैदल चलते हैं और सुबह प्रारंभ होकर यह यात्रा शाम तक खत्म होती है। यह यात्रा उज्जैन के प्रसिद्ध चोबीस खंबा माता मंदिर से प्रारंभ होकर नगर भ्रमण के बाद ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर पर शिखर ध्वज चढ़ाकर समाप्त होती है। इस यात्रा की खास बात यह होती है कि एक घड़े में मदिरा को भरा जाता है जिसमें नीचे छेद होता है। जिससे पूरी यात्रा के दौरान सड़क मार्ग व देवी मंदिरों में मदिरा की धार बहाई जाती है।

इसी परंपरा को निभाने के लिए महाअष्टमी के दिन आज सुबह अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज (निरंजनी अखाड़ा), जिला प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी चोबीस खम्बा माता मंदिर पर पहुंचे और देवी महालया और महामाया की पूजा कर देवी को मदिरा चढाई गई। यह महाष्टमी की महापूजा सुबह 8 बजे से ढोल नगाडों के साथ शुरू हुई । बाद में प्रशासनिक अमला तहसीलदार के नेतृत्व में नगर पूजा पर निकल पडा। महापूजा की यात्रा में कोटवार के हाथ में एक कलश रहता है जिसके पैंदे में छेद किया हुआ होता है ताकि मदिरा की धार लगातार बहती रहे । देवी शक्तियों को चढ़ाई जाने वाली इस मदिरा को प्रसाद के रूप में बडी संख्या में श्रद्धालु ग्रहण भी करते हैं।

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