दिल्ली: राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी जनहित के मुद्दे लगातार संसद में उठाते आ रहै है और जनता के हितों में कार्य कर रहे हैं। संसद में इस बार राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सोलंकी ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे और जानकारी मांगी साथ ही जनता के हितों में कार्य करने की मांग भी उठाई है।
राज्यसभा सांसद ने संसद के शीत कालीन सत्र में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री से इथेनॉल की आपूर्ति के सम्बंध में किया सवाल किया। राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद के शीत कालीन सत्र में शून्य काल के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री से सवाल करते हुए पूछा कि.
(क) इथेनॉल की आपूर्ति के लिए प्रथम ‘रुचि की अभिव्यक्ति’ (ईओआई) प्राप्त होने के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी;
(ख) सरकार द्वारा इथेनॉल की कमी वाले राज्यों में इथेनॉल संयंत्र स्थापित करने के लिए क्या क्या प्रयास किए जा रहे हैं;
(ग) क्या मध्यप्रदेश राज्य में एथेनॉल का संयंत्र स्थापित किया जाएगा; और
(घ) यदि हाँ, तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है?
राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी के उक्त सवाल का लिखित में जवाब देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने बताया कि इथेनॉल की आपूर्ति के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के सम्बंध में डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी के द्वारा दिनांक 19 दिसम्बर 2022 को पूछे गए राज्य सभा तारांकित प्रश्न के सम्बन्ध में परिवहन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के उद्देश्य से सरकार देश में जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2020-25 के लिए भारत मैं एथेनॉल मिश्रण का रोडमैप तैयार किया गया है जिसमें वर्ष 2025-26 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिशानिर्देश का प्रावधान है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसीज) एक इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) के लिए इथेनॉल की कुल आवश्यकता का एक संयुक्त अनुमान तैयार करती है जिसे रुचि की अभिव्यक्ति(ईओआई) के रूप में प्रकाशित किया जाता है बोली दाताओं को मात्रा बोली प्रस्ताव में ओएमसीज की तिमाही मांग के अनुसार उनके द्वारा लोकेशन वार/फीडस्टॉक श्रेणी वार/तिमाही वार आपूर्ति की जाने वाली एथेनाल मात्राओं का उल्लेख करना अपेक्षित है। राज्य के भीतर आपूर्ति यों के मामले में बोली दाताओं से प्रस्तावित मात्रा का आवंटन एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले फीडस्टॉक को प्राथमिकता देकर किया जाता है जिसके बाद ओएमसी लोकेशन के लिए परिवहन कि कम से कम लागत को ध्यान में रखा जाता है इस आवंटन के बाद किसी विशेष ओएमसी लोकेशन के लिए राज्य के बाहर के आपूर्तिकर्ताओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले शेष माल का आवंटन न्यूनतम परिवहन लागत के आधार पर किया जाता है और इसमें फीडस्टॉक कोई भी हो सकता है यदि किसी एक खास लोकेशन के लिए एक से अधिक आपूर्तिकर्ताओं फीडस्टॉक के संबंध में परिवहन लागत का समान रहती है तो फिर डिस्टर्ब प्राथमिकता के अनुसार वरीयता दी जाती है ऐसी लोकेशन के संबंध में जहां आवश्यकता पूरी नहीं होती है शेष मात्रा को अगले एओआई चक्रों के माध्यम से तब तो पूरा किया जाता है जब तक की संपूर्ण मांग पूरी नहीं हो जाती सरकार ने देश में इथेनॉल का उत्पादन और उपयोग बढ़ाने के लिए वर्ष 2014 से अनेक उपाय किए हैं जिनमें संबंधित बीआईएस मानक पूरे करने की शर्त पर पेट्रो रसायन रूट सहित शीरे के अलावा सेल्युलोसिक और लिग्नोसेल्युलोसिक जैसी अन्य गैर खाद्य फीडस्टॉक सामग्रियों जैसे कपास के डंठल गेहूं का भूसा चावल का भूसा खोई बांस आदि से उत्पादित एथेनॉल की अधिप्राप्ति की अनुमति देना एथेनाल के उत्पादन हेतु गन्ना और खाद्यान्नों और भारतीय खाद्य निगम के पास रखे चावल का अधिशेष स्टॉक का उपयोग करने की अनुमति देना है। इथेनाल के वर्धित एक्स मिल मूल्य सहित एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के तहत इथेनॉल की अधिप्राप्ति के लिए प्रशासित मूल्य व्यवस्था ईबीपी कार्यक्रम के लिए एथेनॉल पर जीएसटी की दर कम कर के 5% करना मिश्रण के लिए सभी राज्यों में एथेनॉल की निर्बाध ढुलाई हेतु उपयोग विकास व विनिमय अधिनियम में संशोधन आदि शामिल है। देश में 4 राज्य नामतः उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र कर्नाटक और पंजाब एथेनाल के प्रमुख उत्पादक है अतः एथेनाल की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत थी जिसके लिए सरकार ने एथेनॉल उत्पादन हेतु एक से अधिक फीडस्टॉक सामग्री के उपयोग की अनुमति देने के अलावा एथेनॉल की कमी वाले राज्यों में एथेनॉल संयंत्रों की मदद की है तबसे ओएमसीज ने मध्य प्रदेश राज्य में 23 परियोजना प्रस्ताव को सहित एथेनाल की कमी वाले राज्यों में समर्पित एथेनाल संयंत्रों के लिए 131 परियोजना प्रस्तावको के साथ दीर्घकालिक आफ्टेक करार पर हस्ताक्षर किए हैं मध्यप्रदेश में चुने गए परियोजना प्रस्ताव को की सूची दी गई है इसके अलावा सरकार ने इथेनॉल की कमी वाले राज्यों सहित सभी राज्यों में नई आसवनिया स्थापित करने अथवा मौजूदा आसवनियो का विस्तार करने के उद्देश्य से उद्यमियों की मदद करने के लिए चीनी मिलों तथा शीला खाद्यान्न आधारित स्टैंडअलोन आसवनियो के लिए जुलाई 2018 से अप्रैल 2022 तक विभिन्न एथेनाल ब्याज इमदाद योजनाओं को अधिसूचित किया है।

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