इस साल पितृपक्ष 24 सितंबर 2018 से 8 अक्टूबर 2018 तक चलेगा। पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो अर्पित किया जाता है। इसीलिए इस काल को श्राद्घ काल या महालय भी कहा जाता है। श्राद्ध कर्म जिसमें पिंड दान आैर तर्पण आदि सम्मिलित होते हैं। श्राद्ध पूजा में समय का अत्याधिक महत्व होता है। शास्त्रों में ये बाद बहुत स्पष्ट रूप से बतार्इ गर्इ है कि श्राद्घ तिथि पर किस समय पर किसका श्राद्घ किया जाये ताकि पितरों को पूर्ण संतुष्टि प्राप्त हो सके। इस बारे में मान्यता है कि कुतप वेला श्राद्घ कर्म के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है। ये लगभग दोपहर का समय होता है जो दिन का आठवां मुहूर्त माना जाता है। ये अवधि 11 बज कर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट के बीच रहती है। अत सभी को इसी दौरान श्राद्घ कार्य पूरे करने का प्रयास करना चाहिए। वहीं सभी रिश्तों के हिसाब से श्राद्ध करने का सही समय शास्त्रों में दिया गया है।
पितरों की पूर्ण तृप्ति के लिए होता है श्राद्घ

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