April 23, 2026

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राजशाही अंदाज में निकले बाबा महाकाल, भक्तों को दिए दर्शन

राजाधिराज भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जाने दूसरी बार निकले, पालकी में सवार होकर राजशाही अंदाज में निकली बाबा महाकाल की श्रवण मास की दूसरी सवारी में भी भक्तो का सैलाब उमड़ा, पुरे रास्ते खड़े श्रद्धालु भगवान् की एक झलक पाने को लालायित दिखाई दिए, भगवान् ने पालकी में चन्द्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरुप में दर्शन दिए।
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दक्षिणमुखी भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ माह में निकलने वाली सवारी के क्रम में श्रावण माह के दूसरे सोमवार को दूसरी सवारी तय समय पर शाम 4 बजे निकली। भगवान महाकाल चन्द्रमौलेश्वर के रूप में अपने भक्तों को दर्शन देने चांदी की पालकी में सवार होकर जेसे ही मंदिर के बाहर आये तो जय महाकाल के जयकारो से पूरा आकाश गुंजायमान हो गया, मंदिर के मुख्य द्वार पर ससस्त्र बल ने भगवन को गॉड ऑफ़ ओनर दिया।
पालकी में चंद्र्मोलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरुप में विराजित। भगवान महाकाल के दर्शनों को पूरा शहर उमड़ पडा, आगे आगे कदबिम्ब की गूंज थी तो उसके पीछे पुलिस बेंड और अस्वरोही दल के सदस्य कदमताल करते चल रहे थे, विचित्र वेशभूषाओ में सजे स्वामी मुस्कुराके, खिल्खिलाके और दिलमिलाके के भी अंदाज लोगो को बहुर रास आये, कोई हाथो पर थाली घुमा रहा था तो कोई भुत पिशाच बनकर सवारी में शामिल हुआ, भजन मंडलिया और करतब दिखाते अखाड़े भी बाबा महाकाल की सवारी का एक स्वरुप हे इनके पीछे पीछे हाथो में डमरू, घुंघरू, डपली और झंकार यंत्र लिए बाबा के द्वारपाल माने जाने वाले पण्डे पुजारी चल रहे थे जिनका जोश और जूनून देखते ही बन रहा था।
शिव की भक्ति में तल्लीन भक्त झूमते गाते पुरे रास्ते बोल बम बोल बम के जयकारे लगते रहे, गाजे बाजे और ढोल ताशो के बिच बाबा महाकाल का कारवां शिप्रा के तट पहुंचा जहाँ उपस्थित हजारो लोगो ने महाकाल का पुष्प वर्षा कर स्वागत अभिवादन किया, रामघाट पर रानो जी की छतरी के सामने माँ शिप्रा के जल से भूतभावन की जोरदार आरती हुई इस दौरान मानो पूरी श्रष्टि शिवमय नजर आ रही थी।

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