नारी हूं मैं… शक्ति हूं मैं…!
भारत देश मैं तो श्रद्धा व भक्ति भी हूं मैं,
नौ रुपों में पूजी जाती हूं मैं,
गर अन्नपूर्णा छोड़, अन्य रूप अपनालू मैं,
नहीं भाती फिर किसी को मैं,
सरस्वती देती ज्ञान पर रूप में समा जाऊं मैं,
बना लू गर वजूद मैं,
मैं ही में मैं रह जाती दुनिया पर मैं ही मैं ना बन जाऊं इस लिए रोकी जाती हूं मैं,
यह कहानी नहीं है मेरी, ख़ुश नसीब हु मैं,
रोक ने को फसाना मैं का आगे बढ रही हूं मैं,
महिलाएं बन सके प्रतिबिंब खुद का बस यही चाहती हूं मैं ।
-रजनी तिवारी
प्रधान संपादक
newsprawah.com

More Stories
स्कूल शिक्षा विभाग को विभागीय उपलब्धि एवं उत्कृष्ट कार्य पर मिला सम्मान
पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी
ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस स्टॉफ अर्जुन कारले एवं आउटसोर्स कर्मी शिवपाल निकुम पुरस्कृत