आश्विन माह की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या कहा जाता है। इस दिन से श्राद्ध समाप्त होते हैं। एक तरह से इस दिन पितरों को विदा कर दिया जाता है। इस साल सर्व पितृअमावस्या 17 सिंतबर की है।
दरअसल 16 सितंबर को शाम 7 बजे से अमावस्या लगेगी और 17 सितंबर को शाम 4 बजे तक रहेगी। इसलिए 17 सितंबर को ही सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मुत्यु की तिथि याद ना हो। एक तरह से सभी भूले बिसरों को इस याद कर उनका तर्पण किया जाता है।
ब्रह्म पुराण के अनुसार जो वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम पर उचित विधि से दिया जाता है, वह श्राद्ध कहलाता है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन भी भोजन बनाकर इसे कौवे, गाय और कुत्ते के लिए निकाला जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि पितर देव ब्राह्राण और पशु पक्षियों के रूप में अपने परिवार वालों दिया गया तर्पण स्वीकार कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। इस दिन अपने पूर्वजों के निमित्त के योग्य विद्वान ब्राह्मण को आमंत्रित कर भोजन कराना चाहिए। –पं योगेश द्विवेदी श्री साधना ज्योतिष केंद्र 22,भागसीपुरा गंगा मार्केट उज्जैन (म.प्र.) मोबाइल- 98277-14275

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