सर्दियों की दस्तक के साथ ही त्योहारी आतिशबाजी और मौसम में बदलाव के कारण वायु प्रदूषण का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। तापमान में गिरावट के बीच हवा में घुलने वाले धूल के महीन कण और पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं सांस तथा दिल के मरीजों के लिए गंभीर मुसीबत बन सकता है। ऐसे में हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने प्रदेशभर के अस्पतालों को पूरी तरह अलर्ट करते हुए एक व्यापक स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में पांच साल से कम उम्र के बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, वेंटिलेटर और जरूरी जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
🫁 फेफड़ों से लेकर दिल तक पहुंच रहा है प्रदूषण का खतरा; पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों से बढ़ी चिंता
सूक्ष्म कणों के शरीर पर दुष्प्रभाव:
- खतरनाक सूक्ष्म कण: स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी में बताया गया है कि वायु प्रदूषण केवल आंखों से दिखाई देने वाला साधारण धुआं नहीं है, बल्कि हवा में मौजूद पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) जैसे अदृश्य सूक्ष्म कण शरीर के लिए बेहद घातक हैं।
- गंभीर बीमारियां: ये महीन कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर सूजन और संक्रमण पैदा करते हैं। लंबे समय तक ऐसे प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। थोड़े समय के संपर्क से भी आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
👶 बच्चों, बुजुर्गों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे ज्यादा जोखिम
संवेदनशील समूहों के लिए चेतावनी:
- विशिष्ट श्रेणियां: प्रदूषण का यह नकारात्मक असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। पांच साल से कम उम्र के बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को सबसे अधिक खतरा है। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, जबकि बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
- खुले में काम करने वाले लोग: इसके अलावा सड़क पर खुले में काम करने वाले निर्माण श्रमिक, यातायात पुलिसकर्मी (ट्रैफिक कॉप्स) और छोटे व्यापारी भी प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क में आते हैं, जिससे उनमें सांस का संक्रमण और अस्थमा का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
💨 अस्पतालों को वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सुसज्जित रखने के सख्त निर्देश
चिकित्सकीय तैयारियां:
- संसाधनों की उपलब्धता: त्योहारी सीजन और सर्दियों के दौरान सांस के मरीजों की संख्या में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेजों, सीएमएचओ (CMHO) और सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
- ओपीडी और उपकरण: अस्पतालों की ओपीडी में जनरल मेडिसिन, शिशु रोग, श्वसन रोग (पल्मोनोलॉजी), हृदय रोग और न्यूरोलॉजी विभागों में सभी जरूरी चिकित्सकीय संसाधन दुरुस्त रखने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
🧨 पटाखों का शोर और धुआं दोनों खतरनाक; आतिशबाजी से दूरी बनाने की अपील
धुएं और शोर के दुष्परिणाम:
- जहरीला धुआं: विभाग ने स्पष्ट किया है कि त्योहारी आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं पहले से ही प्रदूषित हवा को और अधिक जहरीला बना देता है। इसमें मौजूद रसायन सांस की नलियों को सिकोड़ सकते हैं।
- मानसिक और शारीरिक असर: तेज आवाज वाले पटाखे न केवल सुनने की क्षमता पर बुरा असर डालते हैं, बल्कि मानसिक तनाव, घबराहट और बेचैनी भी बढ़ाते हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे आतिशबाजी से दूरी रखें और बच्चों तथा बुजुर्गों को पटाखों के धुएं से बचाकर रखें।

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