भोपाल:राजधानी समेत प्रदेशभर के नगरीय निकायों के सफाईकर्मी नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति, ठेका प्रथा समाप्त करने और न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपये करने की प्रमुख मांगों को लेकर बीते तीन दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को सफाईकर्मियों की इस हड़ताल का तीसरा दिन है और अब इन्हें नगरीय निकायों के अन्य कर्मचारियों का भी भारी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। एक तरफ जहां सफाईकर्मियों के समर्थन में यांत्रिक वाहन कर्मचारी संघ पहले से ही हड़ताल पर है, वहीं अन्य सहयोगी संगठनों ने भी शुक्रवार से पूर्ण रूप से काम बंद करने की चेतावनी दे दी है।
🚰 शहर में पानी सप्लाई बंद करने की चेतावनी; अन्य विभागों के कर्मचारी भी उतरे समर्थन में
आंदोलन का विस्तार:
- कर्मचारियों का समर्थन: सफाईकर्मियों के साथ अब नगरीय निकायों के अन्य विभागों में पदस्थ कर्मचारी भी खुलकर मैदान में उतरने लगे हैं। मध्य प्रदेश नगरीय निकाय स्वास्थ्य अधिकारी और स्वच्छता निरीक्षण कर्मचारी कल्याण महासंघ ने अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है।
- पेयजल संकट की आशंका: इसके साथ ही वाटर सप्लाई के कर्मचारी भी हड़ताल के समर्थन में उतर आए हैं। यदि यह चेतावनी अमलीजामा पहनती है, तो शुक्रवार को शहर में सफाई के साथ-साथ गंभीर जल संकट (पानी की सप्लाई ठप होने) का सामना भी करना पड़ सकता है।
🤝 मंत्रालय में घंटों चली उच्चस्तरीय बैठक; नियमितीकरण के मुद्दे पर नहीं बनी कोई सहमति
प्रशासनिक वार्ता और असंतोष:
- मंत्रालय की बैठक: बुधवार शाम मंत्रालय में एसीएस संजय दुबे, नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के साथ कर्मचारी नेताओं की एक लंबी बैठक आयोजित हुई थी।
- बेनतीजा वार्ता: अधिकारियों ने कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग को कैबिनेट से जुड़ा विषय बताते हुए फाइल वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने की बात कही, जिसे कर्मचारी नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया। यूनियन ने सवाल उठाया कि जब अधिकारियों के पास कोई ठोस निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था, तो उन्हें वार्ता के लिए क्यों बुलाया गया। बातचीत विफल होने पर कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है और अब वे मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की तैयारी कर रहे हैं।
📈 2 दिनों में जमा हुआ 2100 टन कचरा; त्योहार के बीच बिगड़े हालात
कचरे का अंबार:
- वैकल्पिक व्यवस्था का असर बेअसर: नगर निगम ने सफाई व्यवस्था सुचारू रखने के लिए गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों और आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए करीब 900 कर्मचारियों को मैदान में उतारा है, लेकिन इसका कोई खास असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। शहर के 85 वार्डों में घर-घर कचरा कलेक्शन करने वाली गाड़ियां नहीं पहुंच रही हैं।
- कचरे की भारी मात्रा: सामान्य दिनों में भोपाल से लगभग 850 टन कचरा प्रतिदिन निकलता है, लेकिन दीपावली के त्योहारी सीजन के चलते यह मात्रा बढ़कर करीब 1050 टन हो गई है। इस हिसाब से दो दिनों में लगभग 2100 टन कचरा जमा हो चुका है, जिससे रिहायशी इलाकों के साथ-साथ प्रमुख बाजारों में भी कचरे का गंभीर संकट गहराने लगा है।
🛒 न्यू मार्केट में व्यापारियों ने खुद संभाली सफाई की कमान; विरोध प्रदर्शन भी तेज
बाजारों की स्थिति और विरोध:
- व्यापारी सड़क पर: सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराने का असर अब भोपाल के प्रमुख बाजारों में दिखने लगा है। न्यू मार्केट में कचरे और गंदगी के ढेरों से परेशान होकर व्यापारियों ने खुद सफाई की जिम्मेदारी उठाई। व्यापारी महासंघ के सचिव अजय अग्रवाल और स्वच्छता एंबेसडर रुचिका सचदेवा ने अन्य व्यापारियों के साथ मिलकर बुधवार को सड़कों पर खुद झाड़ू लगाई।
- तनावपूर्ण माहौल: दूसरी ओर, अटल पथ पर एक कार्यक्रम के दौरान निजी कर्मचारियों से सफाई कराने की कोशिश का आंदोलनकारियों ने जमकर विरोध किया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने ड्राइवरों के साथ मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया और स्वीपिंग मशीनों को भी संचालित नहीं होने दिया।
👥 वाल्मीकि समाज का भी मिला समर्थन; उग्र आंदोलन की चेतावनी
सामाजिक एकजुटता:
- सकल वाल्मीकि पंचायत का समर्थन: सफाई कर्मचारियों की इन जायज मांगों को अब वाल्मीकि समाज का भी खुला समर्थन मिलने लगा है। बुधवार को सकल वाल्मीकि पंचायत वृत्त भोपाल के रवि चौधरी धरना स्थल पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
- कड़ी चेतावनी: उन्होंने प्रशासन को चेताया कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरा वाल्मीकि समाज इस आंदोलन में कूद पड़ेगा और पूरे प्रदेशभर में सफाई कार्य पूरी तरह ठप करा दिया जाएगा।

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