भोपाल: ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश में एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ई.एच.टी.) ट्रांसमिशन लाइनों पर बर्ड सेफ्टी डिवाइस लगाने का कार्य प्रारंभ किया है।
इस पहल का उद्देश्य पक्षियों की मृत्यु दर में कमी लाना, अनावश्यक ट्रिपिंग रोकना और ग्रिड की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वन क्षेत्रों, जलाशयों और प्रवासी मार्गों से होकर गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनें लंबे समय से पक्षियों के लिए खतरा बनी हुई थीं। विशेषकर बड़े आकार के पक्षी जैसे भारतीय सारस और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोड़ावन) जैसी संकटग्रस्त प्रजातियाँ विद्युत प्रवाह के संपर्क या टकराव से अक्सर हताहत होती रही हैं। पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंताओं के मद्देनज़र एम.पी. ट्रांसको ने उन्नत सुरक्षात्मक तकनीकें अपनाई हैं।
लागू किए गए प्रमुख उपाय
बर्ड गार्ड्स: टावरों पर लगाए जाने वाले सुरक्षा कवच, जो पक्षियों को लाइव कंडक्टर या खतरनाक हिस्सों से संपर्क करने से रोकते हैं। प्रिवेंटर्स: इंसुलेटरों पर लगाए जाने वाले रिंग-टाइप उपकरण, जो पक्षियों को संवेदनशील स्थानों पर बैठने से रोकते हैं। फ्लैपर्स: कंडक्टरों पर लगाए जाने वाले परावर्तक (रिफ्लेक्टिव) और गतिशील मार्कर, जो उड़ान के दौरान पक्षियों को चेतावनी देते हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,000 किलोमीटर से अधिक संवेदनशील ट्रांसमिशन लाइनों पर ये उपकरण लगाए जा चुके हैं। प्रारंभिक परिणाम बताते हैं कि इन क्षेत्रों में पक्षी टकराव की घटनाओं और विद्युत आपूर्ति में अवरोध दोनों में कमी आई है।
आंकड़े – 1,53,384 बर्ड गार्ड्स टावरों पर लगाए गए। 4,983 प्रिवेंटर्स इंसुलेटरों पर लगाए गए। 4,705 फ्लैपर्स कंडक्टरों पर लगाए गए, जिनमें रात में दृश्यता के लिए रैडियम कोटेड रिफ्लेक्टर भी शामिल हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे समयानुकूल और अत्यंत आवश्यक कदम बताया है, जिससे बिजली लाइनों के कारण हो रही “पक्षी मृत्यु की मौन त्रासदी” पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। भविष्य में इन उपकरणों की प्रभावशीलता पर नज़र रखने के लिए ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम तथा स्थानीय समुदायों और रखरखाव दलों के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि “यह पहल हमारे पर्यावरणीय दायित्व और परिचालन दक्षता, दोनों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे निर्बाध विद्युत आपूर्ति के साथ हमारी जैव विविधता की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। इस कदम के साथ मध्यप्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जो महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी सक्रिय प्रयास कर रहे हैं।

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