April 19, 2026

News Prawah

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मंदिर जहां नीलवर्ण स्वरूप में देवी का होता है अनोखा अभिषेक

झलक शिकारी।
उज्जैन, एक ऐसा नगर जहाँ समय भी शिव की अनुमति से चलता है। जहाँ हर सांस में मंत्र हैं, और हर पत्थर इतिहास बोलता है।
इसी पवित्र नगरी में विराजमान हैं एक ऐसी देवी,
जिनका नाम शायद ही आपने सुना हो। जिनकी शक्ति शब्दों में समाती है, वह है नील सरस्वती माता।
माता नील सरस्वती का स्वरूप अन्य सरस्वती मां के रूप से कुछ अलग है। यहां मां उजली नहीं, गंभीर हैं… नीलवर्ण में लिपटी हुई, मानो स्वयं में कई रहस्य छुपाए हों।‌
नील सरस्वती केवल विद्या की देवी नहीं बल्कि वाणी, विवेक और लेखनी की अधिष्ठात्री है।
यहां ज्ञान‌‌ केवल किताबों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि
आत्मा तक उतरता चला‌ जाता है।
उज्जैन का यह मंदिर पूरे देश में अनोखा है। यहां माता के पूजन का तरीका भी अनोखा है। यहां मां का अभिषेक
जल, दूध, दही या शहद से नहीं, बल्कि स्याही से किया जाता है। बसंत पंचमी के दिन कलम, दवात और स्याही
मां के चरणों में अर्पित की जाती है।
मान्यता है कि जो विद्यार्थी, लेखक, कवि या पत्रकार
यहां सच्चे मन से नमन करता है, उसकी सोच को दिशा मिलती है,‌ और उसकी लेखनी में धार आती है।
आज के समय में जब शब्द बिक रहे हैं, जब सच लिखना कठिन होता जा रहा है।
वही नील सरस्वती माता हमें साहस प्रदान करती हैं।
लेखनी हमारी पूजा है,
शब्द जिम्मेदारी हैं,
और ज्ञान साहस के बिना अधूरा है।
मां नील सरस्वती का मंदिर छोटा जरूर है, लेकिन इनका महात्म बहुत बड़ा है।
इसी के साथ आप भी कीजिये मां‌ नील सरस्वती के दर्शन।
बसंत पंचमी की आपको हार्दिक शुभकामनाएं……..।

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