खरगोन: मप्र शासन ने बीतें कुछ वर्षों 2003 के बाद हर वर्ग के लिए उनकी जरूरत और आर्थिक सहयोग तथा जनकल्याण के लिए सैकड़ो योजनाएं संचालित कर रही हैं। इन योजनाओं से लाभ प्राप्त करने वाले हितग्राहियों की बात करें तो सैकड़ो, हजारों और लाखों नहीं बल्कि करोडों हितग्राही होंगे ही ? साथ ही इन करोड़ो हितग्राहियों में ऐसे कई परिवार होंगे जिनमें 5 या 10 से अधिक सदस्य विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करते हुए जीवन आसान बनाते हुए प्रगति की दौड़ में होंगे ? शासन ने कई परिवारों को योजनाओं के माध्यम से सशक्त किया है। आईये जानते है कि किसी एक परिवार के कितने सदस्यों और शासन की कितनी राशि से लाभान्वित हो रहे है ? अनुमान लगाए तो एक परिवार में 4 या ज्यादा से ज्यादा 10 सदस्य हितग्राही निकल सकतें है।
जी नहीं खरगोन जिले में एक ऐसा परिवार है जहां 17 सदस्यों को प्रतिमाह 62 हजार रुपये सिर्फ 3 योजनाओं के माध्यम प्राप्त कर रहें हैं। इस परिवार में 5 नहीं 6 नहीं 7 नहीं बल्कि पूरी 12 ऐसी महिलाएं है जो प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की बहनाये है। साथ ही 5 सदस्य पीएम व सीएम किसान सम्मान निधि की प्रतिवर्ष 10-10 हजार रुपये का लाभ प्राप्त कर रहें है।
खरगोन जिले में भगवानपुरा जनपद के ग्राम देवाड़ा में एक ऐसा फलिया है जो एक परिवार से बना है और उसी परिवार के मुखिया के नाम पर वासल्या फलिया जाना जाता है। सामान्यतः एक फलिये में 8-10 परिवार रहते हैं लेकिन पूरा वासल्या फलिया एक ही परिवार से बना हुआ है। स्व. वासल्या पटेल के 5 बेटे और 6 भाईयों सहित परिवार में कुल 90 सदस्य हैं। इस परिवार में 44 पुरूष और 46 महिला सदस्य है। जनजातीय समुदाय के नागरिकों में यह परंपरा रही है कि वे विवाह के बाद अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अलग मकान में रहतें है। लेकिन कई बार रसोई और कृषि सामूहिक रूप से करते है। इस पटेल (ब्राम्हणे) परिवार का एकजुट होकर रहने की भी कुछ ऐसी ही संस्कृति है। सभी के अलग-अलग घर और रसोई है। कुछ भाई सामूहिक रूप से कृषि करते है। लेकिन इससे इनकी एकजुटता पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
प्रदेश में 2 माह पहले शुरु हुई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में इस परिवार की महिलाओं ने भी आवेदन किए थे। संभवतः प्रदेश में एक ही परिवार की सबसे अधिक लाड़ली बहनाएँ और अन्य 2 योजनाओं के माध्यम से प्रतिमाह 62 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में सर्वाधिक राशि प्राप्त करने वाला पहला परिवार होगा ? लाड़ली बहना योजना के पहले चरण में परिवार की 12 महिलाओं के खाते में राशि आना शुरु हो गई है। अब योजना के तहत पात्र महिलाओं की न्यूनतम उम्र 23 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष कर दी गई है। इससे लाड़लियों के इस कुनबे में परिवार की 5 अन्य महिला सदस्य और जुड़ जाएगी। इस तरह योजना का लाभ लेने में एक ही परिवार की कुल 17 महिलाएं लाड़ली बहनाएँ बन जाएगी।
परिवार के सदस्यों ने बताया योजना से मिलने वाली राशि को बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर खर्च किया गया है। परिवार के मुखिया स्व.वासल्या के अलावा इंजनिया, रामलाल, जुरसिंग, जगदीश व कैलाश ब्राम्हणे कुल 6 भाई है। जबकि भूरसिंह, गिलदार, ठेवासिंह, रेलसिंघ और तेलसिंह वासल्या के 5 लड़के है।
योजना से वर्तमान में लाभांवित हो रही महिलाओं में गजरी बाई, गीता बाई, शांता बाई, सनना बाई, रेशमा बाई, निर्मला बाई, शारदा बाई, नारंगी बाई, झूमा बाई, पातली बाई, सायणी बाई व तानी बाई शामिल हैं। इसके अलावा इसी परिवार के 5 सदस्य ऐसे है जो भारत शासन की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के भी हितग्राही है। इसमें उन्हें प्रतिवर्ष 6 हजार रुपए पीएम की ओर से और 4 हजार रुपए सीएम की ओर से मिलते हैं। इनमें परिवार के सुंदरी बाई, गिलदार, तेलसिंग, भूरसिंग व लालीबाई शामिल हैं।
देजला-देवाड़ा तालाब भी इसी फलिये के नजदीक ही है। इसी तालाब पर समिति बनाकर मत्स्याखेट किया जाता है। 104 सदस्यों की समिति में इस परिवार के 48 सदस्य शामिल है। इस तालाब से होने वाली आय में इन सदस्यों का हिस्सा 37500-37500 रुपये एक सीजन में लाभ ले रहे है।

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