उज्जैन(डॉ हीना तिवारी) : देशभर में नागपंचमी के पर्व आज हर्षोल्लास से मनाया जा रहा हैं। नाग मंदिरों में सुबह से भक्तों की भीड़ लगी हैं। लोग नाग देवता के दर्शन पूजन कर रहे हैं।
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर स्थित नागचंद्रेश्वर के पट गुरूवार रात 12 बजे खुल गए। पट खुलते ही पूजा के बाद दर्शन का क्रम शुरू हो गया है। साल भर में एक बार 24 घंटे के लिए खुले मंदिर में शुक्रवार रात तक श्रद्धालू दर्शन कर सकेंगे। कीPनागचंद्रेश्वर के साथ ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
12 ज्योतिलिंग में से एक बाबा महाकाल मंदिर के तीसरे खंड पर स्थित नागचंद्रेश्वर का मंदिर नाग पंचमी की पूर्व रात्री 12 बजे खुल गया। सबसे पहले परंपरानुसार पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी जी महाराज ने मंदिर में विराजित शेष नाग की साए में विराजित शिव प्रतिमा की त्रिकाल पूजा की। इस दौरान कलेक्टर नीरज सिंह , एसपी प्रदीप शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद भी थे।
वहीं नागपंचमी पर नागचन्द्रेश्वर के दर्शन के विशेष महत्व को देखते हुए देश भर से आए श्रद्धालू रात 8 बजे से ही कतार में लग गए। जिन्होने रात 1 बजे से दर्शन कर भगवान का आशिर्वाद लेना शुरू किया।
बता दे कि नागचन्द्रेश्वर मंदिर साल भर में सिर्फ नागपंचमी पर 24 घंटे के लिए खुलता है। इसीलिए बाबा के दर्शनों के लिए पट खोलने के पहले ही भक्तों की कतार लग गई।
महंत विनीत गिरी के अनुसार नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को खुलने की परंपरा प्राचीनकाल से है। अब पट शुक्रवार रात 12 बजे तक खुले रहेंगे। नागपंचमी पर्व पर तवा नही चढ़ने की परंपरा कारण घरों में दाल बाटी चूरमा बनता है जिसका भगवान को भी भोग लगाया जाता है।
नाग पंचमी के विशेष पर्व पर देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यही वजह हैं की इस बार करीब 9 लाख श्रद्धालुओं के आने को उम्मीद है इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था इंतजाम कर दावा किया कि श्रद्धालु मात्र 40 मिनिट में बिना व्यवधान दर्शन कर लेंगे, लेकिन रात 10 बजे ही कर्कराज पार्किंग के पास भगदड़ की स्थिति बन गई थी।
उल्लेखनीय है कि महाकालेश्वर मंदिर में गर्भ गृह में ज्योतिलिंग बाबा महाकाल, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर और तीसरे खंड में नागचन्द्रेश्वर का मंदिर है। माना जाता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण 1050 ईस्वी में परमार राजा भोज ने करवाया था। इसके बाद महाराज राणोजी सिंधिया ने सन 1732 में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार किया था। माना जाता है कि नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा 11वीं शताब्दी में नेपाल से लाकर मंदिर में स्थापित की गई थी। इस प्रतिमा में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव जी पार्वती के साथ बैठे हैं। संभवत: दुनिया में ये एकमात्र ऐसी प्रतिमा है, जिसमें शिव जी नाग शैय्या पर विराजित हैं। मंदिर में गणेश जी, सप्तमुखी नाग देव और दोनों के वाहन नंदी और सिंह भी विराजित हैं। शिव जी के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हैं।
बड़ी संख्या में आज भक्तो की उमड़ी भीड़ के मद्देनजर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा सहित सुलभ दर्शन आदि व्यवस्थाओ को लेकर व्यवस्थाएं की गई हैं। वही मन्दिर परिसर जय श्री महाकाल, जय श्री नागचंद्रेश्वर के जयकारों से गुंजायमान हो गया हैं।

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